हाथरस: जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक लेते डीएम।
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी और नोडल अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह ने बुधवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा की। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इस टीम का लक्ष्य पाना महत्वपूर्ण होता है। 13 टीम काम कर रही हैं। हर टीम को रोज दो ऐसे बच्चे ढूंढने हैं, जिनमें जन्मजात शारीरिक और मानसिक रोग हैं। ऐसे बच्चों की खोज कर उन्हें आगे जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज रेफर करना है, ताकि उन्हें इलाज मिल सके।
आंकड़े दर्शाते हैं कि जन्मजात दोष (बर्थ डिफेक्ट) 100 में से छह बच्चों में होता है। टीम को प्रतिदिन एक बच्चा जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए पहुंचाना है। समीक्षा बैठक में एसीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया बर्थ डिफेक्ट्स नौ प्रकार के होते हैं। प्रतिदिन 13 बच्चे मिल ही जाने चाहिए। आरबीएसके जो सुविधाएं देती है, उसको 4डी यानी कि डेफिशियेंसी, बर्थ डिफेक्ट ,डिसेबिलिटी और कुपोषण हैं।
आरबीएसके की टीम कुपोषित बच्चे चाहे आंगनबाड़ी केंद्रों से निकले चाहें स्कूलों से और बताकर आते हैं। बैठक में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से अपेक्षा की गई कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उन परिवारों की काउंसलिंग करें, जहां बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। उन्हें अस्पताल या पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाने में मदद करें, ताकि उनका कुपोषण दूर हो सके। इस मौके पर डीपीओ डीके सिंह, डीआईओएस सुनील कुमार, बीएसए, न्यूट्रीशन इंटरनेशनल के मंडलीय कोआर्डिनेटर अमित शर्मा, जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सुचिका सहाय, आरबीएसके टीम के सभी टीम लीडर आदि मौजूद थे।