न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
लवों पर जिसके कभी बददुआ नहीं होती, बस एक मां है, जो मुझसे खफा नहीं होती। प्रेम, त्याग और तप की साकार प्रतिमूर्ति है मां। मां मममतामयी छांव का अहसास है। खुशकिस्मत है वो, मां जिसके पास है। लड़खड़ाते को संबल देने का विश्वास है मां। इन्हीं जज्बातों के साथ रविवार को मदर्स डे मनाया जाएगा इससे पहले अमर उजाला ने कुछ खास महिलाओं से जाना कि उन्होंने किस तरह मां के आशीर्वाद, मार्गदर्शन, प्रेरणा और दुलार की वजह से मुकाम हासिल किया है। कुछ महिला अधिकारी भी मां के फर्ज को निभाते हुए अपने सामाजिक फर्ज को भी बखूबी अंजाम दे रही हैं।
मां ने दी अच्छी परवरिश तो नीतू सिंह को मिली सफलता
हाथरस। जिले में तैनात सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) प्रशासन नीतू सिंह के पिता की वर्ष 2011 सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इसके साथ मां ने बच्चों के लालन-पालन के साथ अच्छी पढ़ाई कराई। वर्ष 2013 में नीतू सिंह की सबसे पहली तैनाती नायब तहसीलदार के पद पर बुलंदशहर में हुई। उसके बाद लगातार तरक्की के रास्ते पर चलने का मन बनाया। वर्ष 2015 पहली पोस्टिंग एआरटीओ के रूप में फिरोजाबाद जिले में हुई। वर्तमान में वह हाथरस जिले में एआरटीओ प्रशासन के रूप में कार्यरत हैं। उनके भाई पुलिस विभाग में कार्यरत हैं।
बेटी की परवरिश के लिए छोड़ दी नौकरी
हाथरस। सादाबाद की तहसीलदार कीर्ति चौधरी का कहना है कि उनके पिताजी पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत थे और उनकी मां भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में थीं। कीर्ति का कहना है कि उनकी मां शांति चौधरी ने अपने बच्चों की परवरिश के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी। मां से सदैव कीर्ति चौधरी को सकारात्मक ऊर्जा और संबल मिला। मां ने हौसला दिया तो बेटी ने अपनी मेहनत के बल पर मुकाम हासिल किया। संवाद
मां के स्नेह से बढ़ता है मनोबल : चेतना सिंह
हाथरस। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव चेतना सिंह का कहना है कि मां के स्नेह से मनोबल बढ़ता है। उनके पिताजी बैंक में अफसर थे और मां गृहिणी। मां रजनी सिंह ने उन्हें सदैव प्रेरणा और संबल दिया। उनको घर में माता-पिता से उच्च कोटि के संस्कार मिले और उनसे ही जज बनने की प्रेरणा मिली। प्राधिकरण की सचिव चेतना सिंह कर्म को ही पूजा मानती हैं। अपने व्यस्ततम समय में से सचिव चेतना सिंह मां की कुशलक्षेम लेने के लिए समय निकाल लेती हैं और उनकी मां आज भी उन्हें कर्तव्य पथ पर अविचल भाव से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। संवाद
दोनों दायित्व बखूबी निभा रहीं मोनिका गौतम
हाथरस। महिला कल्याण अधिकारी मोनिका गौतम अपने व्यस्ततम समय में से अपनी दोनों बेटियों दुर्गांशी व त्रिशा गौरांशी के लिए समय निकालती हैं। गौतम की बड़ी बेटी दुर्गांशी की उम्र साढ़े पांच साल व त्रिशा गौरांशी की ढाई साल है। ड्यूटी के साथ-साथ मोनिका अपनी बेटियों को पूरा समय देती हैं। नौकरी के साथ बच्चों की परवरिश पर भी पूरा ध्यान दे रही हैं। वह कहती हैं शुरुआत में सामंजस्य बिठाने में थोड़ी दिक्कत आई, लेकिन अब दोनों जिम्मेदारी बखूबी संभाल रही हैं। संवाद
मां ने दी प्रेरणा तो डौली सिंह को मिली कामयाबी
हाथरस। मां की प्रेरणा से डौली शर्मा आपूर्ति निरीक्षक बनीं। मां के साथ घर के सभी सदस्यों से उन्हें प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा मिली। डौली शर्मा अपनी जिम्मेदारी परिवार और ऑफिस में बखूबी निभाती हैं। वह घर में घर के काम व ऑफिस में ऑफिस के काम से व्यस्त रहती हैं। उनको अपने काम और परिवार दोनों से प्रेम है, इसलिए ऊर्जावान बनी रहती हैं। उनको अपनी बेटी व परिवार के अन्य सदस्यों से काफी उत्साह मिलता है। संवाद
मां ने हौसला बढ़ाया तो सोना जीता मोनम ने
हाथरस। शहर से सटे गांव दयानतपुर की निवासी मोनम रावत ने जब खेल में करियर बनाने की सोची तो मां ने उनका हौसला बढ़ाया। मोनम ने अमेरिकन फ्लैग फुटबॉल में गोल्ड मेडल जीता है। वह प्रदेश स्तर पर भी खेल चुकी हैं। मोनम का कहना है कि उन्हें सबसे ज्यादा प्रोत्साहन अपनी मां से मिला। मां ने उनकी हर समय हौसला अफजाई की और हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। संवाद