न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले का हैंडलूम कारोबार कोरोना के चलते दिन पर दिन बर्बाद हो रहा है। कोरोना काल में करीब 100 फैक्टरियां बंद हो गईं। फैक्टरियां बंद होने से कारोबारियों को लाखों का नुकसान हो रहा है। व्यापारी पूरी तरह धराशायी हो गया है। इससे पांच से छह हजार श्रमिकों के सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस को उद्योग नगरी के नाम से जाना जाता है। इसमें एक हैंडलूम कारोबार भी है। इस कारोबार की वजह से हाथरस ने अपनी दूर-दूर तक पहचान बना रखी है। हाथरस से राजस्थान, मध्यप्रदेश, अमदाबाद, हरियाणा आदि के व्यापारी माल लेने के लिए आते हैं। करीब सौ फैक्टरियों में पांच से छह हजार कर्मी कार्य करते हैं। बीते दो साल से कोरोना काल के चलते यह उद्योग अब बेपटरी हो गया है।
काफी लोगों ने इस काम को पूरी तरह बंद करते हुए मशीनों को भी बेच दिया है। अब वर्तमान में फैक्टरियां बंद चल रही हैं। कारोबारियों को आर्डर पर भेजे माल का आज तक भुगतान नहीं हुआ है। इस कारण कुल मिलाकर हैंडलूम कारोबार को अच्छा खासा नुकसान है। इस कार्य से जुड़े कारोबारी भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
- कोरोना काल के चलते पिछले दो साल से हैंडलूम कारोबार की हालत काफी खराब है। हाथरस से कई प्रांतों को माल जाता है। लेकिन कोरोना कर्फ्यू की वजह से हैंडलूम कारोबार बेपटरी हो गया है। इस कारण सभी को आर्थिक संकटों से जूझना पड़ रहा है। - विजय कुमार शर्मा, हैंडलूम कारोबारी
- हैंडलूम कारोबार से हाथरस की राजस्थान, मध्यप्रदेश में खासी पहचान है। बीते दो साल से कारोबार की हालत खराब है। दिन पर दिन फैक्टरियां बंद होती जा रही है। जिले में इस कार्य से करीब पांच से छह हजार लोग जुड़े हुए हैं। इस कारोबार को आर्थिक संजीवन की आस है। - रोहित माहौर, हैंडलूम करोबारी