शव आने से पहले घर पहुंचे बिजली अधिकारी
पुलिस के समझाने के बाद ग्रामीण गांव लौट गए। दिल्ली से शव आने का इंतजार किया जा रहा था। कार्रवाई न होने पर परिजन मीतई बिजलीघर के सामने शव रख हंगामे के मूड में थे। हंगामे की भनक लगते ही बिजली निगम के अधिकारी दोपहर को राजेश के घर पहुंचे और नियमानुसार मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।
देर शाम गांव में हुआ अंतिम संस्कार
शाम तक परिजनों को समझा लिया गया। इस कारण दिल्ली से पोस्टमार्टम के बाद शव सीधे गांव ले जाया गया। शव आते ही परिवार में कोहराम मच गया। गमगीन माहौल में पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।
तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
राजेश तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। वह अपने पीछे पत्नी व तीन बच्चों को रोता बिलखता छोड़ गया है। बड़ी बेटी छह वर्ष, दूसरे नंबर की चार वर्ष व सबसे छोटा बेटा एक साल का है। पति का शव देख पत्नी बदहवास हो गई, जिन्हें रिश्तेदार संभालते नजर आए। बड़ी बेटी पिता को याद कर रोती दिखी।