हाथरस। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थी सूची में नाम गलत होने की वजह से योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। नाम गलत होने के कारण सैकड़ों लाभार्थियों का केवाईसी सत्यापन नहीं हो पाया है। केवाईसी के जरिये इन लाभार्थियों का जो डेटा फीड किया जा रहा है, उसका स्वास्थ्य विभाग के डेटा से मिलान नहीं हो पा रहा है। इस कारण केवाईसी की प्रार्थना खारिज हो रही है। जनसेवा केंद्र संचालकों को भी इस कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शासन के निर्देश पर जिले में इन-दिनों पात्र लोगों के आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। इस योजना के तहत 2011 की गणना सूची में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उनके गोल्डन कार्ड शिविर लगाकर बनाए जा रहे हैं। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष्मान मित्र व ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के जन सेवा केंद्र संचालकों के माध्यम से गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं।
शासन से निर्धारित सूची में क्षेत्र के अनुसार जिन लोगों के नाम गलत हैं, उन नामों का आधार कार्ड और राशन कार्ड से मिलान करने पर केवाईसी की रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो रही है। इस कारण पात्र लाभार्थी योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं। जनसेवा केंद्र संचालक भी पूरे दिन में एक भी केवाईसी नहीं कर पा रहे हैं।
इस बारे में सीएससी के अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी अवगत करा दिया है। वहीं कई ग्राम पंचायतों में गलत नामों के अलावा अन्य सभी पात्र लाभार्थियों की केवाईसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस आशय का प्रमाणपत्र भी आशा कार्यकर्ताओं द्वारा दे दिया गया है। कई स्थानों पर आशा कार्यकर्ताओं द्वारा इस अभियान में कोई सहयोग नहीं किया जा रहा है। इस कारण इन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से चेतावनी भी जारी कर दी गई है।
-70,360 परिवारों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए जिले को मिला लक्ष्य
-3,51,800 लोगों के बनने हैं गोल्डन कार्ड
-99500 लोगों के जिले में अब तक गोल्डन कार्ड बने
-51 फीसदी जिले के परिवारों के बन चुके हैं गोल्डन कार्ड
सूची में कई ऐसे नाम सामने आ रहे हैं, जो गलत हैं। इन नामों को सही करने के संबंध में कोई शासन स्तर से दिशा-निर्देश नहीं हैं, जिससे इन नामों को सही किया जा सके। सूची में लोगों के घरों के नाम-पते का आधार और अन्य दस्तावेजों से मिलान नहीं हो पा रहा।
-डॉ. प्रभात कुमार, डीपीसी आयुष्मान योजना