न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सूर्य 14 मार्च को शाम छह बजे मीन राशि में प्रवेश कर जाएगा। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाएगा। सूर्य पूरे एक महीने देव गुरु बृहस्पति की मीन राशि में रहेंगे। लिहाजा इस अवधि में कोई मांगलिक कार्य नहीं होंगे। सूर्यदेव मीन राशि को छोड़ते ही पंद्रह अप्रैल से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
आचार्य बल्लभ जी महाराज ने बताया कि हिंदू संस्कृति में मांगलिक कार्यक्रमों में बृहस्पति ग्रह का बड़ा महत्व है। सूर्य के नजदीक आने पर बृहस्पति की सक्रियता न्यून हो जाती है। इस अवस्था को खरमास या मलमास कहा जाता है। इस अवधि में नामकरण, यज्ञोपवती, विवाह या और कोई भी धार्मिक संस्कार और शुभ काम नहीं होता है। सूर्यदेव जब बृहस्पति की राशि में प्रवेश करते है तभी से खरमास प्रारंभ हो जाता है।
सूर्यदेव 14 मार्च शाम छह बजे से देव गुरु बृहस्पति की मीन राशि में प्रवेश करके 14 अप्रैल सुबह ढाई बजे तक रहेंगे। लिहाजा इस अवधि में कोई मांगलिक कार्य नहीं होगा। मलमास से मलिन मास भी माना जाता है। इस दौरान सूर्य उपासना होती है। मान्यता है कि सूर्य भगवान आशीर्वाद से घर में उन्नति, सुख और समृद्धि आती है। इसके अलावा घर में विष्णु भगवान की पूजा करने से लक्ष्मी का आगमन होता है।