न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कर्ज न चुकाने पर जमीन जायदाद हथियाने के मामले तो बहुत सुने होंगे मगर यहां तो भगवान को गिरवी रख लिया गया है। कर्ज के बदले में लाए गए कन्हैया तो हाथरस में हैं, लेकिन इनकी राधा वृंदावन में विराजमान हैं। कन्हैया जी के साथ राधा की दूसरी प्रतिमा विराजमान कराने के लिए कई बार प्रयास हुए मगर असफलता ही मिली। जानकारों की मानें तो अब स्थिति यह है कि पहले वृंदावन में राधा जी की आरती होती है, फिर कन्हैया के मंदिर में घंटे-घड़ियाल गूंजते हैं।
शहर की रुई की मंडी स्थित कन्हैया जी मंदिर का इतिहास बड़ा रोचक है। करीब सात दशक पूर्व शहर के घंटाघर और उसके पास अनाज मंडी थी। घंटाघर से सटे बाजार में कपास व रुई की आढ़तें थीं। इस बाजार को आज भी रुई की मंडी कहा जाता है। यहां एक व्यापारी की आढ़त थी। यह व्यापारी आढ़त के साथ साहूकारी का काम करते थे। इनसे वृंदावन का एक व्यापारी रुपये उधार ले गया। समय पर वह पैसे लौटाने नहीं आया तो व्यापारी खुद वृंदावन पहुंच गए।
वहां का व्यापारी राधा कृष्ण के मंदिर की स्थापना करा रहा था। उसने पैसे बाद में देने के लिए कहा तो यहां के व्यापारी वहां रखी भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को यह कहते हुए उठा लाए पैसा देकर इन्हें ले आना मगर उन्हें डर सताया कि कहीं वृंदावन का व्यापारी रिपोर्ट दर्ज न करा दे, इसलिए उन्होंने प्रतिमा को छिपाकर रख दिया। जब वृंदावन का व्यापारी नहीं आया तो उन्होंने परिचितों को बताया। तदुपरांत परिचितों से राय मशविरा कर रुई की मंडी में मंदिर बनवाकर प्रतिमा को स्थापित कराया गया।
मंदिर पुजारी ने बताया कि मंदिर में अकेले कन्हैया जी विराजमान हैं। इनकी राधा वृंदावन में केसी घाट पर विराजमान हैं। राधा जी की दूसरी प्रतिमा स्थापित करने के लिए कई बार प्रयास किए गए मगर सफलता नहीं मिली।
-योगेश मिश्र, सेवायत पुजारी
ठाकुर कन्हैयाजी के नाम से मंदिर कमेटी बन गई है, जो मंदिर का संचालन कर रही है। समय-समय पर उत्सव का आयोजन होता है। इस बार 156 वां उत्सव मनाया जाएगा। मंदिर का इतिहास बड़ा रोचक है। इनकी राधा जी वृंदावन में विराजमान हैं।
-गोपाल वार्ष्णेय, श्रद्धालु