न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हास्य व्यंग्य के आका काका हाथरसी ने अपनी कविताओं के माध्यम से स्वतंत्रता के समय अंग्रेजी शासन के खिलाफ जमकर अपनी कमल चलाई थी। तीखे व्यंग्य किए थे। इसके बाद वर्ष 1991 में उन्हें शासन ने सम्मानित भी किया था।
हास्य व्यंग्य को हिंदी साहित्य में अहम भूमिका स्थापित करने वाले प्रभुदयाल गर्ग उर्फ काका हाथरसी ने अपनी लेखनी में अंग्रेजी शासन के खिलाफ भी तीखे व्यंग्य किए थे। काका हाथरसी को 1985 में ही पद्मश्री मिल गई, लेकिन शासन को इस बात का अहसास बाद में हुआ कि काका ने स्वाधीनता के आंदोलन में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कलम चलाई। इस पर 1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की ओर से काका हाथरसी को सम्मानित और पुरस्कृत किया गया।
स्वाधीनता संघर्ष के दौरान अंग्रेजों के विरुद्ध स्वदेशी भाषा के लेखन पर घोषित पुरस्कार की शृंखला में काका को बीस हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। जानकार बताते हैं उस समय यह कार्यक्रम शहर के राजरानी मेहरा गेस्ट हाउस में आयोजित हुआ था। इसमें कमिश्नर सहित कई आला अधिकारियों ने शिरकत की थी। बाद में यह पुरस्कार राशि काका हाथरसी ट्रस्ट को दे दी गई थी।
काका ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ किया इस तरह प्रहार
मारग से हट गया जब अंग्रेजी ठूंठ, स्वतंत्रता को लाद लाया मेरा ऊंट। लाया मेरा ऊंट, बैठ गाड़ी में जाओ। अमरीकन अंग्रेज सामने से हट जाओ। कह काका कविराय ध्यान से देखो भइया, झंडे वाला चक्र ऊंटगाड़ी का पहिया।