न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पिछले दिनों शहर की एक आयुर्वेद दवा फैक्टरी को लाइसेंस की वैधता न होने पर सील किया गया था। अब यह शिकायत मिली कि सील होन के बाद भी बाद इस फैक्टरी के अंदर तोड़फोड़ की गई है। इसके संबंध में मिली शिकायत के बाद डीएम द्वारा गठित चार सदस्यीय टीम वहां पहुंची। यहां से एफडीए की टीम ने तीन और क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी की टीम ने आठ नमूने लिए। वहीं फैक्टरी की संचालिका का कहना है कि उनकी फैक्टरी में शिकायतकर्ता ने उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए तोड़फोड़ की है। अगर कोई चोर वहां आया होता तो वह चोरी करके सामान को ले जाता।
कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र के लहरा रोड पर श्री मोहता आयुर्वेद भवन के नाम से फैक्टरी है। इसकी एमडी निवेदिता मोहता हैं। यहां पर करीब 250 प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं बनाने का काम होता था। पिछले महीने शिकायत के आधार पर तत्कालीन एसडीएम सदर ने फैक्टरी का निरीक्षण किया था। मौके पर फैक्टरी स्वामी द्वारा वैध लाइसेंस न दिखा पाने के कारण तत्कालीन एसडीएम अंजलि गंगवार ने इसे सील कर दिया था। मंगलवार को जिलाधिकारी रमेश रंजन ने इसकी जांच-पड़ताल के लिए चार सदस्यों की टीम गठित की।
एसडीएम सदर विपिन शिवहरे की अगुवाई में टीम फैक्टरी पहुंची और जांच पड़ताल की। एफडीए की टीम ने डीओ देवाशीष उपाध्याय के नेतृत्व में काली मिर्च, हींग और स्टार्च के नमूने लिए। वहीं क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार की टीम ने आठ नमूने लिए। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। इससे पहले जब फैक्टरी के मुख्य द्वार की सील खोलकर अंदर प्रवेश किया गया तो वहां काफी सामान टूटा-फूटा पड़ा था। फैक्टरी स्वामी निवेदिता मोहता ने बताया कि इस फैक्टरी पर कुछ लोग कई साल तक बैठते रहे थे। उन्होंने ही यह सारे काम कराए हैं, जो नहीं होने थे। मोहता का आरोप है कि उनकी फैक्टरी बंद कराई गई है और सारी तोड़फोड़ भी इसी के तहत है।