न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
शहर के मथुरा रोड स्थित वेदांता अस्पताल में शनिवार की देर रात को एसडीएम सदर ने छापामारी की। अस्पताल में बिना प्रशिक्षित चिकित्सकों के मरीजों का उपचार होता पाया गया। अस्पताल का भवन भी बिना स्वीकृति के पाया गया। एसडीएम सदर प्रेमप्रकाश मीणा ने अस्पताल को सीज करा दिया है। अस्पताल के प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया गया है। कुछ और लोग भी हिरासत में लिए गए हैं। कार्रवाई से अस्पताल के स्टाफ में खलबली मची रही।
लंबे समय से मिल रही शिकायतों पर शनिवार की रात्रि में एसडीएम सदर प्रेमप्रकाश मीणाके नेतृत्व में मथुरा रोड स्थित वेदांता अस्पताल में छापामारी की गई। जांच में पता चला कि अस्पताल में कोई प्रशिक्षित डॉक्टर ही नहीं है। अस्पताल का प्रबंधक मोहित अग्रवाल भी सिर्फ बीकॉम है और वह नियमित रूप से मरीजों का इलाज करता है। उन्हें गंभीर बीमारियों से संबंधित दवाइयां भी देता है।
अस्पताल में दो डेंगू के मरीज पाए गए। डेंगू होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने नियमानुसार मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस बारे में सूचित नहीं किया और अवैध तरीके से वेदांता अस्पताल में ही उनका लगातार इलाज जारी रखा। यह भी पाया गया कि प्रशिक्षित डॉक्टर के मौजूद नहीं होने पर भी अस्पताल प्रबंधक मोहित अग्रवाल द्वारा मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
मोहित अग्रवाल सिर्फ बी.कॉम पास है। शुरू में कम धनराशि बताकर मरीजों को अस्पताल में रोका जा रहा है। भर्ती होने के उपरांत उनके द्वारा अनाधिकृत रूप से मरीजों का इलाज किया जा रहा जा रहा है और उनसे काफी मोटी धनराशि वसूली जा रही है। यह भी जानकारी मिली कि मरीजों और उनके परिजनों के बार-बार निवेदन करने के बावजूद मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया।
कई ऐसे कर्मचारी भी वहां पाए गए, जिनके पास स्वास्थ्य संबंधी कोई भी डिग्री नहीं थी। एसडीएम ने बताया कि बिना प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा आईसीयू जैसे अत्यंत संवेदनशील काम किए जा रहे थे, जो की पूरी तरह नियम विरुद्ध हैं। 12वीं कक्षा में पढ़ाई करने वाले 17 वर्षीय छात्र से स्टाफ के रूप में काम कराया जा रहा था। उन्होंने बताया कि अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी थाने में दर्ज करवाई जा चुकी है और बाकी पीड़ितों की तरफ से भी रिपोर्ट दर्ज करवाई जा रही हैं। अस्पताल में मौके पर चार मरीज भर्ती पाए गए, जिनको जिला अस्पताल में शिफ्ट कराया गया। अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सीज कर सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में ले लिया गया। अस्पताल प्रबंधक मोहित अग्रवाल गिरफ्तार कर लिया गया है।
हंगामे के बाद शिकायत पर हुआ फर्जी अस्पताल का भंडाफोड़
हाथरस। इस अस्पताल में शनिवार की रात को उस समय हंगामा हुआ, जब मुरसान के गांव छोटुआ के कुछ लोग अपने मरीज को डिस्चार्ज कराना चाहते थे। अस्पताल के स्टाफ ने उसे डिस्चार्ज करने से मना कर दिया और 38 हजार रुपये मांगने लगे। इस पर मरीज के तीमारदारों का कहना था कि महज एक दिन के 38 हजार रुपये वह कैसे दे सकते हैं। हंगामे की जानकारी प्रशासन तक पहुंची और एसडीएम सदर ने जब छापामारी की तो इस फर्जी अस्पताल का भंडाफोड़ हुआ।
अस्पताल संचालक सहित दस के खिलाफ रिपोर्ट
हाथरस। कोतवाली हाथरस गेट में वेदांता अस्पताल के संचालक मोहित अग्रवाल सहित 10 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें जसपाल सिंह निवासी आवास-विकास कॉलोनी ने कहा है कि उसने 11 अक्तूबर को अपनी पत्नी करुणा को अस्पताल में दाखिल कराया था। वहां भर्ती से लेकर इलाज के नाम पर 87 हजार रुपये ले लिए गए। जब पत्नी को अच्छा इलाज नहीं मिला तो मैंने अच्छे इलाज के लिए रेफर करने को कहा। इन लोगों ने मुझसे 30 हजार रुपये और मांगे। जब मैंने यह कह दिया कि अब यह रुपये देने की मेरी सामर्थ्य नहीं है तो इन लोगों ने गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी। इससे उसे आर्थिक व मानसिक परेशान हुई। इस मामले में मोहित अग्रवाल के अलावा डॉ. सुरेश छावड़ा, डॉ. विवेक कुमार, अस्पताल स्टाफ शशीकांत, रोहित, किशन कुमार, रश्मि, अतुल, विकास, केहरी सिंह को नामजद किया गया है।