हाथरस मामले में बिटिया के परिजनों का कहना है कि वह इस बार अपनी फसल किसी को मजदूरी देकर कटवा लेंगे। बिटिया के भाई का कहना है कि सरकार द्वारा दी गई आर्थिक मदद उनके खाते में आई या नहीं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। किसी अधिकारी ने उनसे मकान या नौकरी को लेकर अभी तक बातचीत नहीं की है।
परिवार को यह भी मलाल है कि उनके यहां बड़े-बड़े नेता आए लेकिन किसी ने फिर से फोन पर उनका हाल-चाल नहीं पूछा। उल्लेखनीय है कि योगी सरकार ने इस घटना के बाद बिटिया के परिजनों को आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और शहर में आवास देने की घोषणा की थी। इस बारे में पूछने पर बिटिया के भाई ने बताया कि सरकार द्वारा दी गई सहायता राशि उनके खाते में पहुंची है या नहीं, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि उन्होंने खाता चेक नहीं किया है।
यहां यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जब पीड़ित परिवार से मिलने आए थे तो उन्होंने बिटिया के परिजनों को दस लाख रुपये का चेक दिया था। आरपीआई के रामदास अठावले ने भी उनसे खाता नंबर पूछा था और पांच लाख रुपये देने की घोषणा की थी।
स्थानीय जिला प्रशासन भी यह कह चुका है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता मिल चुकी है। इधर, बिटिया के परिजनों का यह भी कहना है कि सरकारी नौकरी और आवास को लेकर उनसे किसी अधिकारी ने कोई बातचीत नहीं की है। वहीं बिटिया के परिजनोें ने पूछने पर यह भी बताया कि वह अपनी फसल को मजदूरी पर कटवा लेंगे।
पुलिस सुरक्षा के बीच आखिर वह कैसे काम कर पाएंगे। उनकी करीब पांच बीघा फसल में इस बार बाजरा हुआ है। बिटिया के परिजन यह भी कह रहे हैं कि इस प्रकरण में उनके यहां कई बड़े नेता आ चुके हैं लेकिन किसी ने फिर उनका फोन कर हाल-चाल नहीं पूछा है। इस परिवार से मिलने उस समय राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, टीएमसी से लकर सपा, वामदल, आप, रालोद के नेता आए थे।
हमारे कोई चाचा ही नहीं तो किसके हुई बात
आप सांसद संजय सिंह द्वारा पीड़ित परिवार को दिल्ली में अपने साथ रखने की पेशकश को लेकर पूछे गए सवाल के बारे में बिटिया के पिता ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। वैसे उनका कोई छोटा भाई नहीं हैं। बिटिया के भाई का भी यही कहना है कि उनका कोई चाचा नहीं है तो आखिर किस नेता कि किसके बातचीत हुई, उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने संजय सिंह को जानने से भी इनकार कर दिया। विदित हो कि संजय सिंह भी पीड़ित परिवार से मिलने आए थे और गांव के बाहर उन पर विरोधियों ने स्याही भी फेंकी थी। उल्लेखनीय है कि संजय सिंह से पहले भी कई नेता इस परिवार को अपने साथ रखने की पेशकश कर चुके हैं।