न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले के दो विकास खंड क्षेत्र सिकंदराराऊ और हसायन मलेरिया की दृष्टि से संवेदनशील हैं। यहां पर जलभराव की स्थिति सबसे ज्यादा रहती है। इसी के चलते इन दोनों विकास खंड क्षेत्रों पर स्वास्थ्य विभाग ज्यादा निगरानी कराता है। मलेरिया से बचाव के लिए इन दोनों क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
चार प्रकार का होता है मलेरिया
मलेरिया एक पैरासाइटिक रोग है, जो एनोफेलीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह एनोफेलीज मच्छर प्लासमोडियम नामक पैरासाइट ढोती हैं। जब यह मच्छर काटता है, पैरासाइट खून में जा कर रेड ब्लड सेल्स को नष्ट करता है। यह एनोफेलीज मच्छर ट्रॉपिकल और सुब्त्रोपिकाल जगहों पे पाया जाता है। चार प्रकार के मलेरियल पैरासाइट होते है जो इंसानों को इन्फेक्ट करते हैं। संवाद
ये हैं मलेरिया के प्रकार
- प्लासमोडियम वाइवेक्स (पीवी) - सबसे ज्यादा मौजूद
- प्लासमोडियम ओवाले (पीओ) - सबसे दुर्लभ प्रकार
- प्लासमोडियम मलेरिया (पीएम) - हर जगह पे पाया नहीं जाता
- प्लासमोडियम फेल्किपेराम (पीएफ) - सबसे ख़तरनाक
मलेरिया के लक्षण
- लगातार बुखार रहना।
- ज्यादा पसीना आना।
- शरीर में कमजोरी आना और दर्द रहना
- सिरदर्द।
- ज्यादा ठंड लगना।
मलेरिया के बचाव के तरीके
- घर के पास साफ-सफाई रखें।
- कूलर के पानी की सप्ताह में एक बार सफाई करें।
- पुराने बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
- पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
- मच्छरदानी या मॉस्किटो रेप्लीकेंट का उपयोग करें।
वर्ष 2021-22 में जिले में मिले थे मलेरिया के 21 मामले
जनपद में दो प्रकार के मलेरिया के केस सामने आते रहे हैं। पहला प्लासमोडियम वाइवेक्स और दूसरा प्लासमोडियम फेल्किपेराम मलेरिया शामिल है। हालांकि वर्ष 2021-22 में मलेरिया के 21 पॉजिटिव केस मिले थे, जिनमें सभी केस प्लासमोडियम वाइवेक्स मलेरिया के थे। मलेरिया की दृष्टि से विकास खंड हसायन और सिकंदराराऊ का क्षेत्र संवेदनशील है।
- लोगों को जलभराव न होने देने की सलाह दी जा रही है। क्योंकि पानी के कारण मच्छर जनित बीमारी होती हैं। मलेरिया का मच्छर हसायन व सिकंदराराऊ में सबसे ज्यादा पनपता है। इसलिए वहां पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है। - डॉ. एएस वशिष्ठ, सीएमओ।