न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले का नाम बेशक बिजली चोरी के मामले में शासन तक छाया रहता है, लेकिन यह बात भी सही है कि सरकार को लाखों रुपये महीने का राजस्व देने वाले जिले के उद्योग पर्याप्त बिजली आपूर्ति से महरूम हैं। दो दर्जन से अधिक औद्योगिक इकाइयों से विभाग को हर माह लाखों रुपये का राजस्व मिलता है, लेकिन बिजली महकमे के अधिकारियों ने अभी तक औद्योगिक क्षेत्र के लिए अलग फीडर बनाने की सुधि नहीं ली है। पिछले दिनों उद्यमियों ने डीएम के सामने अपनी यह समस्या उठाई तो उनके निर्देश पर विभागीय अधिकारी औद्योगिक क्षेत्र के लिए अलग लाइन बनाने के लिए नजदीकी विद्युत उपकेंद्र की तलाश में जुट गए हैं।
हाथरस को पुराने समय से उद्योगों की नगरी कहा जाता है। शहर के अलीगढ़ रोड पर बने औद्योगिक क्षेत्र में गलीचा, आयुर्वेदिक रसायनशाला, हार्डवेयर, साबुन, दाल मिल, जूता, चप्पल आदि की दो दर्जन से अधिक फैक्टरियां हैं। इन फैक्टरियों के लिए पूर्व में फीडर बनाया गया था, लेकिन इस फीडर से विभाग ने कुछ कॉलोनियों की आपूर्ति जोड़ दी। अब इस लाइन में फाल्ट के कारण उद्योगों को भी बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उद्यमियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
वर्ष 2000 की उद्योग नीति के तहत बने फीडर
औद्योगिक अस्थान के अध्यक्ष देवेंद्र मोहता का कहना है कि पूरे प्रदेश में उद्योग नीति के तहत उद्योगों के लिए अलग फीडर बनाए गए थे। सभी जगह यह फीडर बन गए। प्रदेश में हाथरस ही एक ऐसा जिला है, जहां अभी तक उद्योगों के लिए अलग फीडर नहीं बना है। चार वर्ष पहले फीडर बनाने के लिए एस्टीमेट भी बना, लेकिन यह ठंडे बस्ते में चला गया। बीते दिनों डीएम के समक्ष व्यापारियों ने अपनी बात रखी तो डीएम ने नया फीडर बनवाने का आश्वासन दिया।
अब बिजली विभाग तलाश रहा सबस्टेशन
बिजली महकमे के अधीक्षण अभियंता पवन कुमार अग्रवाल व अधिशासी अभियंता सुभाष चंद्रा ने बीते दिनों औद्योगिक अस्थान का निरीक्षण किया। बीच रास्ते में आने वाले खंभों को दूसरे स्थान पर लगवाने का आश्वासन दिया। बिजली विभाग के अधिकारी औद्योगिक फीडर के लिए सब स्टेशन का चयन करने पर माथापच्ची कर रहे हैं। इसका चयन होने के बाद उद्योगों को बेहतर बिजली मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।