न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
अनुशासनहीनता के आरोप में बसपा से निलंबित सादाबाद के विधायक व पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने शुक्रवार को त्यागपत्र दे दिया। विधानसभा चुनाव के चलते जिले की राजनीति में उलटफेर जारी है। अब पूर्व ऊर्जा मंत्री व सादाबाद के विधायक रामवीर उपाध्याय ने बसपा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने इस सिलसिले में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को पत्र भेजा है। वह शनिवार को भाजपा में शामिल हो जाएंगे। वह अपने आगरा स्थित आवास पर ही पार्टी की सदस्यता लेंगे। ऐसे में भाजपा उन्हें सादाबाद सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है।
प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने बसपा से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने बसपा की राष्ट्रीय राष्ट्रीय मायावती को भेजे पत्र में कहा है कि वर्ष 1996 से बसपा के सक्रिय सदस्य हैं। पार्टी को ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और वर्ष 2007 में बसपा की सरकार बनाई। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव, 2012 के विधानसभा चुनाव, 2014 के लोकसभा चुनाव और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक सीट न जीतने पर भी पार्टी द्वारा कोई समीक्षा नहीं की गई, इसकी मैंने समय-समय पर मांग भी की। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मैंने आपको अवगत कराया था कि इस चुनाव में भी हम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन सीट हासिल नहीं कर रहे हैं। हमारे पास से कैडर वोट भी खिसक रहा है, लेकिन आपने सच्चाई को नकारते हुए मुझे पार्टी से निलंबित कर दिया। इससे मेरी और मेरे समर्थकों की भावनाएं आहत हुई।
बसपा कांशीराम जी के बनाए आदर्शों व सिद्धांतों से भटक गई है, इसलिए मैं बसपा की सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं। इधर, पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय शनिवार को भाजपा में शामिल हो जाएंगे। वह अपने आगरा में शास्त्रीपुरम निवास पर ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। बताते हैं कि पहले आगरा में उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की मौजूूदगी में उन्हें शनिवार को सदस्यता लेनी थी, लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते अब वह अपने शास्त्रीपुरम, आगरा स्थित आवास पर सुबह 11 बजे एक कार्यक्रम में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। वहां कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाएंगे। संवाद
बसपा से पांच बार रह चुके हैं विधायक, पत्नी सांसद तो भाई भी रह चुके हैं विधायक
हाथरस। बात यदि रामवीर उपाध्याय के राजनीतिक कैरियर की करें तो जिले की राजनीति में वर्ष 1993 में उनकी एंट्री हुई थी। तब उन्होंने भाजपा से टिकट पाने के लिए कोशिश की थी, लेकिन टिकट न मिलने पर उन्होंने हाथरस सदर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था और तीसरे स्थान पर रहे थे। तदुपरांत वर्ष 1996 में वह बसपा में शामिल हो गए। तब से लगातार पांच बार बसपा के टिकट पर चुनाव जीतते आ रहे हैं। जब-जब प्रदेश में बसपा की सरकार बनी, तब-तब रामवीर उपाध्याय कबीना मंत्री भी बने। वर्ष 2012 में वह बसपा से सिकंदराराऊ सीट से विधायक चुने गए और उसके बाद वर्ष 2017 से सादाबाद सीट से बसपा से उन्होंने विजयश्री हासिल की। इतना ही नहीं उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय वर्ष 2009 में बसपा से ही फतेहपुर सीकरी से सांसद चुनी जा चुकी हैं और उनके भाई मुकुल उपाध्याय भी इगलास से बसपा से विधायक रहे हैं। ऐसे में रामवीर उपाध्याय का बसपा से करीब 25 साल का नाता अब टूट गया है। हालांकि उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय, पुत्र चिराग उपाध्याय, भाई मुकुल उपाध्याय, रामेश्वर उपाध्याय सहित अन्य सभी परिवार के सदस्य पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं। सीमा उपाध्याय भाजपा के समर्थन से वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष भी हैं। संवाद
बसपा से वर्ष 2019 से चल रहे थे निलंबित
हाथरस। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा आलाकमान ने उन पर यह आरोप लगाया था कि वह अनुशासनहीनता कर रहे हैं और भाजपा के प्रत्याशियों का समर्थन कर रहे हैं। इसी के चलते तब उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया था। निष्कासित नहीं किया गया। हालांकि रामवीर उपाध्याय के निलंबन के बाद ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह पार्टी बदल लेंगे, लेकिन दल बदलने पर उनकी विधायकी खतरे में पड़ सकती थी। अब चूंकि विधानसभा चुनाव की तिथि घोषित हो चुकी हैं। ऐसे में उपाध्याय ने बसपा से त्यागपत्र दे दिया है। संवाद
पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने बसपा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। शनिवार को आगरा में शास्त्रीपुरम स्थित आवास पर भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। कोरोना के चलते यह कार्यक्रम ही रखा गया है। इस बार भी वह सादाबाद से चुनाव भी लडे़ंगे। उनके स्वास्थ्य में भी अब काफी सुधार है।
-सीमा उपाध्याय, अध्यक्ष जिला पंचायत, हाथरस व पत्नी पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय।