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हाथरस : वाणिज्य कर के वादों के निस्तारण की तिथि 30 जून तक बढ़ाएं

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिला कर अधिवक्ता एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने रविवार को मुख्यमंत्री को ईमेल के जरिये पत्र भेजा है, जिसमें वर्ष 2017 -18 के वाणिज्य कर के वादों में कर निर्धारण की अंतिम तिथि 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून 2021 निर्धारित करने की मांग की है।
जिला कर अधिवक्ता एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेमप्रकाश वार्ष्णेय व सचिव विनोद कुमार अग्रवाल की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वाणिज्य कर विभाग द्वारा वर्ष 2017-18 (अप्रैल से जून) तक की अवधि के वैट के वादों की सुनवाई की अंतिम तिथि 31 मार्च तय की गई है। वर्तमान में पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में वाद लंबित हैं। इस अवधि में कर निर्धारण अधिकारियों द्वारा इनका निस्तारण सुनवाई कर किया जाना संभव नहीं है। अधिकारियों के समक्ष लंबित वादों को एकपक्षीय रूप से निस्तारण करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। एकपक्षीय आदेश से व्यापारी के विरुद्ध फर्जी मांग निकलती है।
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वर्ष 2017-18 के वादों के संबंध में व्यापारियों को निर्धारित तिथियों की जानकारी भी सही रूप से नहीं हो पा रही है। नोटिस की सही तरह तामिली नहीं हो पा रही है। ऐसी स्थिति में अधिकारी व्यापारियों को तारीख की जानकारी न होने के कारण वादों की सुनवाई भी नहीं कर पा रहे हैं। वर्ष में 2016-17 के वादों की सुनवाई भी कोरोना महामारी के कारण 30 अक्तूबर 2020 तक हुई है। उसके बाद लगातार जीएसटी में काम का दबाव व्यापारियों व अधिवक्ताओं तथा अधिकारियों पर रहा है। इसके बाद अधिवक्ता आयकर रिटर्न में 15 फरवरी तक व्यस्त रहे। अभी भी जीएसटी के रिटर्न का दबाव लगातार बना हुआ है।
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वर्ष 2019- 20 जीएसटीआर-9 व जीएसटीआर नाइन सी की अंतिम तिथि 31 मार्च 2021 है। ऐसी स्थिति में व्यापारी व कर प्रोफेशनल पर काफी दबाव है। वर्ष 2017-18 के वादों की सुनवाई कराना इतनी कम अवधि में संभव नहीं हो पा रहा है। होली के त्योहार के कारण भी व्यापारी अपने काम में व्यस्त हैं। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2017 -18 के वादों की सुनवाई की तिथि तीन माह तक बढ़ाई जानी चाहिए। यदि इसकी समय सीमा को अंतिम दिनों में बढ़ाया तो उसका कोई भी लाभ व्यापारियों को मिलने वाला नहीं है, क्योंकि तब तक प्रदेश में लाखों वादों का निस्तारण एक पक्षीय रूप से किया जा चुका होगा।
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