इस बार शीत लहर में प्रशासन ने गरीबों को घटिया क्वालिटी के कंबल वितरित कर दिए। सरकारी बजट से खरीदे गए यह कंबल मानक के विपरीत मिले हैं। इस बात का खुलासा लेब से टेस्ट होकर आए कंबल के नमूने की जांच रिपोर्ट में हुआ है। स्थिति यह है कि सर्दी का मौसम लगभग समाप्त हो चुका है और 95 फीसदी कंबल बट भी चुके हैं। ऐसे में खरीदे गए कंबलों के नमूनों की प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट से अफसरों में खलबली मच गई है।
शासन की ओर से ठंड व शीत लहर में गरीबों को ठिठुरन से बचाने के लिए कंबल वितरित किए जाने के लिए बजट आवंटित किया गया था। शासन की ओर से 20-20 लाख रुपये की दो किश्तें गरीबों को कंबल मुहैया कराने के लिए दी गई थी। बजट आने के बाद जिला प्रशासन की ओर से कंबल सप्लाई देने के लिए शासन की ओर से चयनित संस्थाओं से टेंडर डलवाए गए। कई कार्यदायी संस्थाओं ने कंबल वितरण के लिए अपनी अपनी दरों पर टेंडर प्रकिया में हिस्सा लिया। लखनऊ की एक संस्था को करीब 382 रुपये प्रति कंबल की दर से कंबल की सप्लाई देने के लिए नामित किया गया।
जिला प्रशासन को कंबल मिलने के बाद प्रशासन की ओर से कंबल में वूलन की क्वालिटी सहित अन्य तकनीकी जांच के लिए लैब को एक कंबल भेजा गया। जिससे कि शासन स्तर से निर्धारित मानकों व गुणवत्ता की कसौटी पर खरा उतरा जा सके, लेकिन यह लैब से यह रिपोर्ट प्रशासन को तब मिल सकी, जब करीब 95 फीसदी कंबलों का वितरण प्रशासन की ओर से कर दिया गया।
लैब की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि गरीबों व असहायों को वितरित किए कंबल में वूलन की मात्रा शासन की ओर से निर्धारित मानकों से कम थी। इस रिपोर्ट के आने के बाद अधिकारियों में खलबली मची हुई है। हैरानी की बात यह है कि गरीबों व असहायों को भी शासन के मानकों को दरकिनार वाले कंबलों का वितरण कर दिया गया। वहीं लैब की रिपोर्ट के आने के बाद अधिकारियों में खलबली मची हुई है।
कंबल का एक नमूना लैब में टेस्ट को भेजा गया था। नमूने की जांच में वूलन की मात्रा निर्धारित मानक से कम निकली है। अब कार्यदायी संस्था को भुगतान में कटौती कर भुगतान किया जाएगा।
प्रवीण कुमार लक्षकार, डीएम