न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के शैक्षिक सत्र 2004-05 के दौरान बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर जनपद के परिषदीय विद्यालयों में नौकरी पाने वाले 20 शिक्षकों का वेतन रोका गया था। इससे पहले 10 शिक्षकों को फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस ने बर्खास्त कर दिया था।
यह कदम बीएसए ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एकल बेंच में याचिका संख्या 190/2020 नीलम चौहान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य में पारित दिनांक 29 अप्रैल 2020 के आदेश के बाद लिया था। लेकिन अब कोर्ट ने सभी प्रकार के आदेशों पर रोक लगाते हुए शिक्षकों को राहत पहुंचाने का काम किया है, जिसे लेकर शिक्षक काफी खुश हैं। इधर, विभाग को उच्चाधिकारियों के आदेश का इंतजार है।
एसआईटी जांच के आधार पर जनपद हाथरस के तथाकथित टेंपर्ड आरोपित शिक्षकों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की डबल बेंच में विशेष याचिका संख्या 451/20 सरिता शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य योजित की गई। उक्त याचिका के माध्यम से शिक्षकों द्वारा एसआईटी की जांच और एकल बेंच के आदेश पर विश्वविद्यालय द्वारा की जा रही कार्रवाई का विरोध किया। जिस पर उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने 27 अगस्त 2020 को एकल पीठ के बर्खास्तगी सहित पूर्ण आदेश पर प्रश्न चिन्ह लगाकर रोक लगा दी।
उक्त आदेशों के क्रम में शिक्षकों द्वारा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस को ज्ञापन दिया गया और यह मांग की गई कि एकल पीठ के आदेश पर रोक लगने से उनके द्वारा पूर्व में वित्त एवं लेखाधिकारी हाथरस को वेतन अवरुद्ध करने के पत्र के औचित्य विहीन होने के फलस्वरूप वेतन निर्गत किया जाए। एकल बेंच के आदेश से प्रभावित सभी शिक्षकों को राहत मिलने से खुशी की लहर है। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश पर सभी शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा खुशी जताई गई है।
- कोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं, लेकिन इस संबंध में जब तक कोई विभागीय आदेश प्राप्त नहीं होता, तब तक यथास्थिति रहेगी। शासन का आदेश प्राप्त होते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - मनोज कुमार मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस।