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हाथरस : महिलाओं की शिक्षा में वैदिक शिक्षा पद्धति का योगदान अहम

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हाथरस : सासनी के कन्या गुरुकुल महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन अतिथिगण। संवाद - फोटो : SASNI
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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देश में शिक्षा के लिए सबसे अधिक पीड़ा महर्षि दयानंद सरस्वती ने महसूस की। वैदिक शिक्षा के माध्यम से अंग्रेज सरकार की जड़े हिल गई थी। शिमला में आयोजित शिक्षा सम्मेलन में अंतिम वायसराय ने यह बात स्वीकार की थी कि वैदिक शिक्षा के माध्यम से अंग्रेज सरकार कमजोर हो चुकी है। दयानंद सरस्वती की दूरदर्शिता एवं उदारता के कारण गुरुकुलों में वैदिक शिक्षा पद्धति से भारत में स्त्री शिक्षा को बढ़ावा मिला। उक्त बातें कन्या गुरुकुल महाविद्यालय में आयोजित 11 दिवसीय आर्य वीरांगना दल प्रशिक्षण समारोह के समापन पर मुख्य अतिथि डॉ. राम प्रकाश शर्मा ने कही।
उन्होंने कहा कि भारत में स्त्री शिक्षा आर्य समाज की ही विचारधारा है। दयानंद सरस्वती के विचारों से सरकार को प्रेरणा लेनी चाहिए। महर्षि दयानंद सरस्वती का उपकार चुकाया नहीं जा सकता है। समापन के मौके पर गुरुकुल की ब्रह्मचारणियों ने योगाभ्यास व करतब दिखाए। इससे पूर्व वैदिक रीति रिवाज से मंत्रोच्चारण के साथ हवन यज्ञ कराया गया। मौके पर अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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वैदिक एवं शारीरिक व अनुशासन सेवा में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली ब्रह्मचारणियों को प्रशस्ति पत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओमप्रकाश आर्य ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में विनोद चौधरी, रविकरन आर्य, अरुण कुमार भार्गव, विनोद कुमार वार्ष्णेय, चंद्रमोहन रावत, आर्चाय ब्रजेश, अनिल कुमार आदि मंचासीन थे। कार्यक्रम का संचालन गुरुकुल की मुख्य अधिष्ठात्री डॉ. पवित्रा विद्यालंकार ने किया। संवाद
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