न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सासनी क्षेत्र के पांच उपभोक्ताओं द्वारा बिजली विभाग के खिलाफ की गई शिकायतों को महज चार माह में निस्तारित किया है।
सासनी क्षेत्र निवासी द्रोपदी देवी, कमलेश आदि सात उपभोक्ताओं ने आयोग से शिकायत की थी कि उनके चार-चार, पांच-पांच वर्ष पुराने घरेलू विद्युत संयोजन पर विद्युत विभाग द्वारा उस क्षेत्र में बन रही स्वर्णधाम कॉलोनी के आवेदन के उपरांत संयोजन लेते समय से ही शहरी क्षेत्र की विद्युत दर के अनुसार बकाया दिखाते हुए विद्युत बिल की मांग की जा रही है। 19 जुलाई को उन्हें नोटिस दिया गया और जवाब की प्रतीक्षा किए बिना 23 जुलाई को उनके बिजली कनेक्शन काट दिए गए। आयोग ने 11 अगस्त को मामलों की सुनवाई के दौरान पाया कि वाकई विद्युत विभाग द्वारा उन्हें 19 जुलाई को उन पर दर्शाई गई बकाया धनराशि को एक सप्ताह में जमा करने का नोटिस देकर 23 जुलाई को उनके विद्युत संयोजन काट दिए गए हैं। हालांकि, विद्युत विभाग द्वारा इसका कारण संयोजन को काटने की जगह उपभोक्ताओं को दी जा रही आपूर्ति की लाइन की केबल का का जलना बताया गया है।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राकेश कुमार व सदस्य कृष्ण प्रभाकर उपाध्याय व रंजना गोयल ने 13 अगस्त को विद्युत विभाग को इन उपभोक्ताओं के संयोजन तत्काल जोड़ने के आदेश दिए। वाद की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि विद्युत विभाग का यह कहना सही है कि उनके द्वारा इन सभी उपभोक्ताओं को शहरी क्षेत्र के फीडर से विद्युत आपूर्ति दी जा रही थी, किंतु सभी उपभोक्ताओं द्वारा जमा किए जा रहे विद्युत बिल ग्रामीण क्षेत्र के लिए लागू दर पर थे।
इस विसंगति की पड़ताल करने पर आयोग ने पाया कि इसमें उपभोक्ताओं की कोई कमी नहीं थी, बल्कि तत्कालीन विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों ने ही इन्हें ग्रामीण क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति दर्शाकर उनके संयोजनों को ग्रामीण क्षेत्र के संयोजन के रूप में स्वीकृत कर बिल भेजे थे। सभी उपभोक्ता इन बिलों का समय से भुगतान कर रहे थे। सभी सातों शिकायतों पर उपभोक्ता आयोग ने नौ दिसंबर को अंतिम निर्णय पारित करते हुए उपभोक्ताओं को बिजली विभाग द्वारा भेजे गए सभी पुराने मांग नोटिसों को निरस्त कर दिया है। आयोग ने 10 सितंबर को जोड़े गए संयोजन की तिथि से मीटर रीडिंग के आधार पर शहरी विद्युत दर से विद्युत बिल वसूलने के भी आदेश दिए हैं। संवाद