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हाथरस : हाथरस में कांग्रेस छह, बसपा चार और भाजपा दो बार जीती

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर राजनीतिक दल तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में हाथरस विधानसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं। भाजपा इस सीट पर फिर से अपना परचम लहराना चाहती है तो अन्य प्रमुख विपक्षी दल भी अपनी जीत के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। इस सीट पर भाजपा अब तक केवल दो बार ही जीती है। वर्ष 2012 के चुनाव में यह सीट आरक्षित हो गई। उससे पहले इस सीट पर सबसे ज्यादा ब्राह्मण प्रत्याशी ही जीते हैं। उनको जाट समाज के प्रत्याशी टक्कर देते रहे हैं और जीत भी हासिल करते रहे हैं। कांग्रेस ने यहां से सर्वाधिक छह बार विजय हासिल की तो बसपा ने भी चार बार चुनाव जीता। भाजपा यहां से अब तक दो बार ही जीत हासिल कर सकी है।
इतिहास देखें तो आजादी के बाद 1952 से लेकर तीन चुनाव इस सीट पर कांग्रेस के नंद कुमार देव वशिष्ठ ने जीते। इसके बाद वर्ष 1967 का चुनाव यहां से भारतीय जनसंघ के रामसरन सिंह ने जीता। अगले वर्ष 1969 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस ने वापसी की। यह चुनाव कांग्रेस के पं. प्रेमचंद शर्मा ने जीता। कांटे के मुकाबले में उन्होंने बीकेडी के किशनप्रसाद को हराया था। इसके बाद 1974 में इस चुनाव में कांग्रेस ने फिर जीत दर्ज की। इस बार कांग्रेस ने प्रत्याशी बदला और टिकट दी नारायण हरि शर्मा को। नारायण हरि शर्मा ने भी जीत हासिल की। 1977 में कांग्रेस विरोधी लहर में जनता पार्टी के उम्मीदवार कुं. रामसरन सिंह ने जीत हासिल की और कांग्रेस के उम्मीदवार पं. प्रेमचंद शर्मा को परास्त किया। इसके बाद वर्ष 1980 में भी कांग्रेस यहां से सीट नहीं निकाल पाई। इस बार जीते जनता पार्टी के पं. सूरजभान से कांग्रेस लगातार यहां से दूसरी बार हारी।
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वर्ष 1985 में अगला चुनाव कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहा। कांग्रेस ने पूर्व में एक बार जीते नारायण हरि शर्मा को इस बार टिकट दिया और नारायण हरि शर्मा यहां से जीते भी। इस बार उनके मुकाबले लोकदल के रामसरन सिंह थे, जोकि चुनाव हार गए। तदुपरांत 1989 में जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े रामसरन सिंह ने अपनी हार का बदला ले लिया। उन्होंने कांग्रेस के हरिबाबू शर्मा को चुनाव में परास्त कर दिया। करीब 22 हजार वोटों से रामसरन सिंह ने जीत हासिल की।
इसके बाद वर्ष 1991 के चुनाव में जनता दल से फिर रामशरन सिंह लड़े और उन्होंने भाजपा के मा. सत्यपाल सिंह को करीब आठ हजार वोटों से पराजित किया। वर्ष 1193 में भाजपा को इस सीट पर पहली बार जीत हासिल हुई। भाजपा प्रत्याशी राजवीर सिंह पहलवान ने इस बार बसपा प्रत्याशी हिलाल अहमद कुरैशी को करीब 800 वोटों के अंतर से परास्त किया। इसके बाद इस सीट से बसपा के रामवीर उपाध्याय ने हैट्रिक बनाई। वर्ष 1996, 2002 व 2007 का चुनाव बसपा प्रत्याशी रामवीर उपाध्याय ने जीता। वर्ष 1996 में रामवीर उपाध्याय ने भाजपा के तत्कालीन विधायक राजवीर सिंह पहलवान को चुनाव हराया। वर्ष 2002 में उन्होंने रालोद प्रत्याशी देवस्वरूप शर्मा और वर्ष 2007 में उन्होंने रालोद के ही प्रत्याशी देवेंद्र अग्रवाल को परास्त किया।
इस दौरान जब-जब बसपा की सरकार बनी, तब-तब रामवीर उपाध्याय सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद वर्ष 2012 के चुनाव में जब सासनी विधानसभा सीट को समाप्त कर दिया गया तो हाथरस सीट आरक्षित कर दी गई। ऐसे में वर्ष 2012 में बसपा ने इस सीट से सासनी के विधायक चौ. गेंदालाल को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने भाजपा के राजेश दिवाकर को हराया।
तदुपरांत वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने हरीशंकर माहौर को टिकट दिया। माहौर इससे पहले भी सासनी से तीन बार विधायक रह चुके थे। मोदी लहर में माहौर ने बड़े अंतर से पिछला चुनाव जीत लिया और दूसरे स्थान पर बसपा के बृजमोहन राही रहे। माहौर ने राही को 70,661 वोटों से परास्त किया था। इस समय हरीशंकर माहौर यहां से भाजपा के विधायक हैं। सभी राजनीतिक दल यहां से अपनी जीत के लिए जोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं। अभी किसी पार्टी ने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं।
सीट हुई आरक्षित तो रामवीर को बदलना पड़ा निर्वाचन क्षेत्र
हाथरस। वर्ष 2012 के चुनाव में जब यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई तो कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय सहित कई नेताओं का चुनावी गणित गड़बड़ा गया। इस सीट से तीन बार विधायक निर्वाचित हुए रामवीर उपाध्याय को यहां से सीट बदलकर सिकंदराराऊ से चुनाव लड़ना पड़ा। वह वहां कड़े मुकाबले में चुनाव जीते। इसके बाद वर्ष 2017 का चुनाव वह सादाबाद से बसपा से ही लड़े और वहां से भी विधायक निर्वाचित हुए। संवाद
इस सीट पर जीते दो विधायक ही बन सके हैं मंत्री
हाथरस। इस सीट से जीते कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय जहां तीन बार ऊर्जा और परिवहन जैसे अहम विभागों के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वहीं इस सीट से वर्ष 1969 में विधायक चुने गए पं. प्रेमचंद शर्मा भी यहां से चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की पं. कमलापति त्रिपाठी के नेतृत्व वाली सरकार में स्वास्थ्य राज्य मंत्री रहे। संवाद
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रामसरन सिंह ने सबसे ज्यादा चार बार हासिल की जीत
हाथरस। इस विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा कुं. रामसरन सिंह ने जीत हासिल की। वह चार बार विधायक चुने गए, जबकि रामवीर उपाध्याय, नंद कुमार देव वशिष्ठ ने तीन-तीन बार जीत हासिल की। दो बार नारायण हरि शर्मा ने विजयश्री प्राप्त की। संवाद
हाथरस विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
-वर्ष 1952 से लेकर वर्ष 1962 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नंद कुमार देव वशिष्ठ लगातार तीन बार चुने गए विधायक।
-वर्ष 1967 में भारतीय जनसंघ से रामसरन सिंह जीते।
-वर्ष वर्ष 1969 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से पं. प्रेमचंद शर्मा जीते।
-वर्ष 1974 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नारायण हरि शर्मा जीते।
-वर्ष 1977 में जनता पार्टी के रामसरन सिंह जीते।
-वर्ष 1980 में जनता पार्टी के पं. सूरजभान जीते।
-वर्ष 1985 में कांग्रेस के नारायण हरि शर्मा जीते।
-वर्ष 1989 व वर्ष 1991 के चुनाव में लगातार दो बार जनता दल के रामसरन सिंह ने जीत हासिल की।
-वर्ष 1993 में भाजपा के राजवीर सिंह पहलवान जीते।
-वर्ष 1996, 2002 व वर्ष 2007 का चुनाव लगातार बसपा से रामवीर उपाध्याय ने जीता।
-वर्ष 2012 का चुनाव बसपा से गेंदालाल ने जीता।
-वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा के हरीशंकर माहौर ने जीत हासिल की।
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