न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
यातायात के नियमों के उल्लंघन पर हाथरस डिपो की बसों के हो रहे चालान की मार चालकों पर पड़ रही है। इन चालान की धनराशि की भरपाई डिपो के अधिकारी चालकों के वेतन से कर रहे हैं। अब तक डिपो की 100 से अधिक बसों के चालान हो चुके हैं। इसे लेकर चालकों में खासा गुस्सा है। जो चालान डिपो में आ रहे हैं, उनमें गाड़ी नंबर तक स्पष्ट नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में 79 बसें हैं। इनमें करीब 30 बसें सुबह से शाम तक लोकल रूटों पर संचालित होती हैं। लोकल रूट पर संचालन में लगे चालक इन-दिनों खासे परेशान हैं। आगरा, अलीगढ़ और मथुरा में यातायात पुलिस द्वारा रोडवेज बसों का चालान किया जा रहा है। जो फोटोयुक्त चालान किए जा रहे हैं। उसमें बस संख्या तक साफ नहीं दिख रही है। चालकों का कहना है कि जब चालान काटा जाता है तब यातायात पुलिस कर्मियों द्वारा यह भी नहीं बताया जाता कि वह किस वजह से चालान कर रहे हैं।
हर रोज काउंसिलिग, फिर भी चालान का बोझ
हाथरस डिपो से बस लेकर जाने वाले चालकों की हर रोज कार्यशाला में काउंसिलिंग की जाती है। उन्हें बताया जाता है कि वह बस का संचालन मध्यम गति से करें। सीट बेल्ट लगाकर ही बस का संचालन करें। यात्रियों को उतारते समय बस को साइड से लगा लें। अफसरों की पाठशाला में हर रोज पढ़ने वाले चालक भी कह रहे हैं कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा बिना वजह उनके चालान काटे जा रहे हैं। डिपो के अधिकारी यह कह रहे है कि रोडवेज का चालक हर रोज गलती नहीं कर सकता है, फिर चालान का बोझ क्यों बढ़ रहा है, यह सोचने वाली बात है। इस बारे में पड़ोसी जिलों के पुलिस अधिकारियों को पत्राचार से अवगत कराना चाहिए, ताकि चालान की संख्या में कमी आ सके।
100 से अधिक चालान होने से चालकों में गुस्सा
संविदा पर कार्यरत चालकों को वेतन भी काफी कम मिलता है। अब तक 100 से ज्यादा चालान हाथरस डिपो को प्राप्त हो चुके हैं। इन चालान के आधार पर डिपो के अफसरों द्वारा चालकों के वेतन से कटौती की जा रही है। इसे लेकर चालकों में खासा गुस्सा है। चालक इस बात को लेकर खासे परेशान हैं कि वह आखिर ऐसा क्या करें, जिससे उनके वेतन से कटौती न हो।
अब तक 100 से अधिक चालान हो चुके हैं। चालान की भरपाई चालकों के वेतन से की जा रही है।
-शशिरानी, एआरएम