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कारोबार: विदेशियों पर चढ़ा भारतीय संस्कृति का रंग, हाथरस के कलर और गुलाल का बढ़ा 23 फीसदी निर्यात

Tue, 16 Dec 2025 06:11 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

समय के साथ रंग-गुलाल का कारोबार भी बदला है। अब होली का पर्व को सामूहिक रूप से मनाए जाने के चलते कई नए-नए उत्पादों की मांग बढ़ी है। इनमें मुख्य रूप से गुलाल के सिलिंडरों की मांग सबसे अधिक है।
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शहर की एक फैक्टरी में सजे रंग-गुलाल के पैक - फोटो : संवाद
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विस्तार
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विदेशियों पर भारतीय संस्कृति का रंग चढ़ रहा है। यही वजह है कि हाथरस के पारंपारिक रंग-गुलाल की धमक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही है। पिछले पांच साल में हाथरस से इनका निर्यात 65 करोड़ से बढ़कर 80 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, यानी 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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उद्यमियों का मानना है कि विदेशों में सनातन संस्कृति, भारतीय त्योहारों और खासकर होली उत्सव के का प्रचार-प्रसार काफी बढ़ गया है, जिसकी वजह से वृद्धि हुई है। हाथरस में रंग और गुलाल के कारोबार का टर्न ओवर 260 करोड़ रुपये हैं। इसमें 80 करोड़ का निर्यात होता है। हाथरस में इनकी 15 बड़ी और 35 छोटी इकाइयां हैं, जिनमें करीब 800 लोगों को रोजगार मिल रहा है।

हाथरस में तैयार होने वाला रंग-गुलाल अपनी चमक, शुद्धता, प्राकृतिक रंगत और सुरक्षित निर्माण प्रक्रिया के लिए जाना जाता है। मलेशिया, सिंगापुर, दुबई, ब्राजील, अमेरिका, कनाडा, इंग्लैड, आस्ट्रेलिया व नेपाल जैसे देशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। उद्यमियों का कहना है कि रंग-गुलाल की जन्मभूमि माने जाने वाले हाथरस रंग-गुलाल की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि संभल, जयपुर और हरियाणा जैसे अन्य प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों के आपूर्तिकर्ता प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते हैं।

विदेशों से रंग-गुलाल की मांग में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का रूझान विदेशों में दिख रहा है। वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोग होली को पर्व को जोरदार तरीके से मना रहे हैं।-अमित अग्रवाल, रंग-गुलाल के उत्पादक।

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इस साल डिमांड अच्छी आनी चाहिए। धूप में गुलाल सूखता है, कोहरा आना शुरू हो गया है, धूप हल्की हो रही है तो अब माल का उत्पादन धीरे-धीरे कम हो जाएगा। दिसंबर माह के अंत तक पैकिंग कार्य पूरा कर, माल की डिलीवरी शुरू हो जाएगी।-अशोक वार्ष्णेय, रंग-गुलाल के उत्पादक।
रंग-गुलाल की मांग लगातार बढ़ रही है। देश के साथ विदेशों से भी गुलाल की बुकिंग हो रही है। बदलते दौर के साथ कारोबार में भी काफी बदलाव आए हैं, अब गुलाल के सिलिंडर, स्प्रे सहित तमाम प्रकार के नए उत्पाद बन रहे हैं।-रामबिहारी अग्रवाल, रंग-गुलाल के उत्पादक।
हाथरस रंग-गुलाल की जन्म स्थली है। यहां के ब्रांड की अपनी अलग पहचान है। यहां इतने प्रकार की क्वालिटी है कि हाथरस का मुकाबला कहीं से नहीं हो सकता।-देवेन्द्र गोयल, रंग-गुलाल के उत्पादक।
 

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गुलाल के सिलिंडरों की बढ़ी मांग

समय के साथ रंग-गुलाल का कारोबार भी बदला है। अब होली का पर्व को सामूहिक रूप से मनाए जाने के चलते कई नए-नए उत्पादों की मांग बढ़ी है। इनमें मुख्य रूप से गुलाल के सिलिंडरों की मांग सबसे अधिक है। पांच किलो से लेकर 20 किलो गुलाल वाले सिलिंडर हाथरस में तैयार हो रहे हैं। इसके अलावा गुलाल स्प्रे भी तैयार किए जा रहे हैं। रंगीन धुंए वाले पटाखों की भी ट्रेडिंग की जा रही है, लेकिन यह धुंआ नुकसानदायक होने के चलते इसकी मांग कम है।
गुजरात से आए पक्के रंगों से तैयार होते हैं होली के रंग
जनपद के रंग कारोबारी गुजरात से पक्के रंग मंगवाते हैं। इन रंगों को यहां रिड्यूज किया जाता है। फ्लेवर, क्वालिटी के हिसाब से इन्हें अलग-अलग प्रकार के रंगों में बदला जाता है। अलग-अलग तरह की पॉलिश की जाती है। इसके बाद गुणवत्ता के हिसाब से सूखे, गीले रंग के साथ स्प्रे आदि तैयार किए जाते हैं।

कई तरह के गुलाल का होता है उत्पादन
जनपद में कई रंगों के गुलाल शामिल होते हैं। सबसे अधिक हर्बल रंग बिकते हैं। फ्लावर बेस, फ्रूट बेस, स्टॉर्च, प्रीमियम आदि हैं। कई कारोबारी अपनी अलग क्वालिटी तैयार करते हैं, जिन्हें बृजवासी, स्पर्श गोविंदा आदि कई प्रकार के नाम दिए जाते हैं। हर एक क्वालिटी में छह से दस तरह के रंगों वाला गुलाल बनता है।
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