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हाथरस : शहरवासियों को अभी नहीं मिलेगी कूड़े से निजात

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हाथरस : जलेसर रोड पर सीवेज फार्म की भूमि। संवाद - फोटो : HATHRAS
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गौरव भारद्वाज
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हाथरस। शहर के लोगों को अभी कूड़े के ढेरों से मुक्ति नहीं मिलेगी। इसकी वजह यह है कि अभी तक नगर पालिका के प्रस्तावित कूड़ा निस्तारण प्लांट पर काम ही शुरू नहीं हुआ है। नगर पालिका इसके लिए जमीन भी दे चुकी है, लेकिन अभी तक कार्यदायी संस्था ने वहां प्लांट का काम ही शुरू नहीं कराया है। भवन निर्माण के बाद वहां मशीनें लगेंगी। तब कहीं जाकर कूड़े का निस्तारण होगा। इस काम में अभी समय लगेगा। इसकी वजह से शहर में और ज्यादा संक्रामक रोग फैलने की आशंका है।
ग्रामीण क्षेत्र में इस समय बुखार का प्रकोप जारी है। गंदगी और जलभराव इसकी मुख्य वजह है। शहर में भी कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। करीब ढाई साल पहले इस समस्या का निराकरण कराने के लिए नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा ने पहल की थी। वह अपनी टीम को लेकर खुद इंदौर गए थे और वहां कूड़ा निस्तारण की योजना के लिए प्रशिक्षण भी हुआ था।
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उसके बाद यहां कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट की स्थापना के लिए हरी झंडी मिली थी, लेकिन उसके बाद काम अटक गया। नगर पालिका ने सीवरेज फॉर्म पर अपनी भूमि भी दे दी, लेकिन कोरोना काल में काम रुक गया। अब जब कोरोना का कहर कम हो रहा है तो इस प्लांट के स्थापित होने में अभी समय लगेगा। इसके लिए निर्माण एजेंसी सीएंडडीएस ने हाल ही में टेंडर निकाला है।
यहां साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से भवन, चारदीवारी और टिनशेड आदि कार्य होगा। उसके बाद यहां मशीनें स्थापित की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि शहर के 36 हजार घरों में लाखों की आबादी रहती है। आबादी के हिसाब से हर रोज कई टन कूड़ा शहर में निकलता है। केंद्र सरकार द्वारा लोगों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए हाथरस सहित प्रदेश के कई जिलों में नगर निकायों की आबादी के हिसाब से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्लांट स्थापित कराए जा रहे हैं। प्लांट लगाने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने जल निगम को भूमि भी उपलब्ध करा दी है, लेकिन कई माह बीतने के बावजूद अभी तक इस भूमि पर प्लांट के निर्माण की शुरुआत नहीं हुई है। संवाद
जलेसर रोड पर डाला जा रहा कूड़ा
पालिका प्रशासन द्वारा शहर के जलेसर रोड पर शहर के अलग अलग इलाकों का कूड़ा डाला जा रहा है। बरसात के दिनों में यहां रहने वाले लोगों का जीना दूभर हो जाता है। कूड़ा व गंदगी पानी के बहाव के साथ सड़क पर आ जाती है। यहां के लोग कई बार इस समस्या को लेकर जाम भी लगा चुके हैं और प्रदर्शन भी कर चुके हैं लेकिन इस समस्या का निराकरण अभी नहीं हुआ है। वैसे जब प्लांट लग जाएगा तब गीले कूड़े से खाद, सूखे कूड़े से ईटों का निर्माण होगा। घरों से निकलने वाली प्लास्टिक से सड़कों पर एक लेयर प्लास्टिक की डाली जाएगी। जिससे बरसात के दौरान सड़कें खराब न हो। संवाद
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए टेंडर निकाला गया है। अक्तूबर से काम की शुरुआत होगी। साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत टिनशेड, बाउंड्रीवाल और भवन का निर्माण होगा। जो मशीनें लगेंगी, वह कार्य अलग संस्था द्वारा किया जाएगा।
-डीके शर्मा, परियोजना प्रबंधक
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