न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोहरे में रोडवेज बसों की लालबत्ती भी धोखा दे रही है। इसे लेकर बसों के चालक परेशान हैं। डिपो की अधिकांश पुरानी बसों में पीछे की बत्तियां ही नहीं जल रही हैं। सामान के अभाव और कर्मियों की कमी के कारण हालत नहीं सुधर रहे हैं। ऐसी स्थिति में बसों के संचालन के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
हाथरस डिपो में वर्तमान में 83 बसें हैं। इसमें काफी बसें पुरानी हैं। ये बसें बीच रास्ते में आए-दिन धोखा दे रही हैं। डिपो की काफी बसें लोकल और लंबे रूट पर संचालित होती हैं। डिपो के अधिकारी राजस्व की खातिर बसों को बिना खामियां दूर कराए ही रूटों पर चलवा रहे हैं।
अधिकांश बसों की पीछे की बत्तियां बंद होने के कारण चालकों को दुर्घटनाओं का डर सताता रहता है। इस बारे में कई बार डिपो के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, लेकिन आज तक हालत जस के तस बने हुए हैं।