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हाथरस : तीनों सीटों पर जीत के लिए भाजपा ने बिछाई बिसात

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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विधानसभा चुनाव के मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे राजनीति सरगर्मियां और तेज हो रही हैं। भाजपा इस बार जिले की तीनों सीटों पर अपना कब्जा चाहती है। इसी रणनीति से भाजपा ने सियासी बिसात बिछाई है। तीनों सीटें जीतने के लिए पार्टी ने जातीय समीकरणों के हिसाब से प्रत्याशी उतारे हैं। एक विधायक का टिकट भी पार्टी ने काटा है। पार्टी इस बार सादाबाद सीट पर भी जीत चाहती है और इसी हिसाब से पार्टी ने पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को अपने खेमे में शामिल कर उन पर दांव लगाया है।
यदि जिले की राजनीति का इतिहास देखें तो भाजपा ने हाथरस सदर सीट पर केवल दो बार ही जीत हासिल की है। वर्ष 1993 में भाजपा से पहली बार राजवीर सिंह पहलवान ने जीत हासिल की। उसके बाद पिछले चुनाव वर्ष 2017 में भाजपा की सदर सीट से हरीशंकर माहौर ने जीत हासिल की। सादाबाद सीट पर भाजपा ने वर्ष 1991 में पहली बार जीत हासिल की। तब भाजपा के चौ. विजेंद्र सिंह यहां से विधायक चुने गए। वर्ष 1996 में इस सीट से भाजपा के चौ. विशंभर सिंह ने जीत हासिल की। इसके बाद भाजपा इस सीट को नहीं जीत सकी। सिकंदराराऊ सीट पर भाजपा को अब तक तीन बार सफलता मिली है। वर्ष 1996 में यहां से यशपाल सिंह चौहान विजयी हुए।
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तदुपरांत वर्ष 2007 ने भाजपा से दूसरी बार यशपाल सिंह चौहान ने ही जीत हासिल की। तदुपरांत पिछले चुनाव वर्ष 2017 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में वीरेंद्र सिंह राना ने परचम लहराया। पिछली बार पूरे प्रदेश में भाजपा की सुनामी चली। ऐसे में भाजपा ने सदर और सिकंदराराऊ सीट तो जीत ली, लेकिन सादाबाद सीट पर भाजपा को जीत हासिल नहीं हुई। इस सीट पर बसपा से रामवीर उपाध्याय जीते। भाजपा इस सीट पर दूसरे स्थान पर भी नहीं रही। पूरे अलीगढ़ मंडल में यही सीट थी, जो भाजपा के खाते में नहीं आई। इस बार भाजपा की रणनीति जिले की तीनों सीटों पर अपना परचम लहराने की है। उसी हिसाब से पार्टी ने रूपरेखा तैयार की है।
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पार्टी ने अपनी इसी रणनीति के तहत पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को अपने खेमे में शामिल कर उन्हें सादाबाद से उम्मीदवार बनाया है। वहीं पार्टी ने चार बार के विधायक रहे हरीशंकर माहौर का टिकट काटकर सदर सीट पर उनके स्थान पर अंजुला माहौर को मैदान में उतारा है। वह आगरा की पूर्व मेयर भी हैं। भाजपा ने वर्तमान विधायक का टिकट तो काटा है, लेकिन उन्हीं की बिरादरी की प्रत्याशी को मैदान में उतारा है, जिससे पार्टी का परंपरागत वोटर नाराज न हो। वहीं सिकंदराराऊ से वर्तमान विधायक वीरेंद्र सिंह राना पर फिर दांव लगाया है। पार्टी हर सूरत में जिले की तीनों सीटों पर इस बार कब्जा करना चाहती है। इसी वजह से पार्टी ने जातीय समीकरण के हिसाब से प्रत्याशी उतारे हैं। संवाद
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