न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
अक्षय तृतीया का पर्व शुक्रवार को जिले में मनाया जाएगा। इस दिन पूजन और दान का बहुत महत्व है। इस दिन मृगशिरा नक्षत्र और सुकर्मा योग और वृषभ राशि का संयोग बन रहा है, जो इस दिन को अधिक शुभ और प्रभावशाली बनाएगा।
आचार्य बल्लभ जी ने बताया कि सूर्य इस दिन मेष राशि से वृष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के राशि परिवर्तन से इस दिन वृष राशि में सूर्य और बुध के संयोग से बुधादित्य योग बन रहा है। इस दिन शुक्र स्वराशि वृष में रहेंगे। वहीं चंद्रमा उच्च राशि में होंगे। अक्षय तृतीया पर चंद्रमा का शुक्र के साथ शुक्रवार को वृष राशि में गोचर करना धन, समृद्धि और निवेश बहुत ही शुभ फलदायी होगा। उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया पर चंद्रमा शाम में मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मिथुन राशि इस समय मंगल का संचार हो रहा है। ऐसे में चंद्रमा के मिथुन राशि में आने से यहां धन योग के असार बन रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध व अबूझ मुहूर्त है। इसमें विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार आदि सभी कार्य किए जा सकते हैं। अबूझ मुहूर्त होने के कारण इस दिन विवाह शादी भी खूब होंगे। इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि त्रेतायुग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ था। भगवान को सत्तू का भोग भी लगाया जाएगा।
अक्षय तृतीया को किया दान नहीं होता क्षय
अक्षय तृतीया का मान 14 मई को सुबह पांच बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 15 मई सुबह सात बजकर 59 मिनट तक रहेगा। अक्षय तृतीया का पूजन सुबह 14 मई सुबह पांच बजकर 30 मिनट से दोपहर बारह बजे तक श्रेयस्कर रहेगा। इस दिन चांदी-सोना खरीदने से समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन दान के फल का क्षय नहीं होता है। इस दिन जल से भरा कलश, पंखा, छाता, गाय, आदि दान करना शुभ होता है। मंदिर में जल से भरा कलश व खरबूजा चढ़ाया जा सकता है। इस दिन व्यापारी अपने खातों का पूजन भी करते हैं।
अक्षय तृतीया पर रहेगा कोरोना कर्फ्यू का साया
हाथरस। अक्षय तृतीय पर्व पर भी इस बार कोरोना कर्फ्यू का साया है। इस दिन काफी शादी विवाह होते हैं, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के चलते इस बार ज्यादातर शादी समारोह टल गए हैं। साथ ही जो कार्यक्रम होंगे भी, उसमें बंद हॉल में केवल 20 व खुले स्थान पर अधिकतम 50 लोग ही आ सकेंगे। अक्षय तृतीया पर इस बार भी बाजार बंद रहेगा। इससे कारोबार भी प्रभावित होगा। सराफा बाजार बंद होने के कारण लोग सोने-चांदी के आभूषण भी नहीं खरीद सकेंगे। भगवान परशुराम जी की शोभायात्रा भी नहीं इस साल नहीं निकलेगी।