न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा की जा रही लगातार कार्रवाई से जिले के शिक्षा माफिया में खलबली मच गई है। जिले के दो स्कूलों के प्राचार्य सहित चार लोगों के खिलाफ छात्रवृत्ति घोटाले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद इस मामले में और सख्ती होने की उम्मीद है। जिले की और भी कई शिक्षण संस्थाएं हैं, जिनमें कागजों पर छात्र संख्या दिखाकर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का गोलामाल किया गया है। इन मामलों की जांच भी ईओडब्ल्यू कर रही है। गौरतलब है कि पूर्व में एक शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले में पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
उल्लेखनीय है कि जिले के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले ने सरकारी महकमों में शिक्षा माफिया की गहरी पैठ का अहसास करा दिया है। जिले में पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की साठगांठ से 41 कॉलेजों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की 24.92 करोड़ रुपये की धनराशि का बंदरबांट किया गया। हैरानी की बात यह है कि जिन मदरसों को छात्रवृत्ति दी गई, उनको उन्हीं सत्रों में मान्यता मिली थी। आज तक यह मदरसे अस्तित्व में ही नहीं मिले।
अब छात्रवृत्ति घोटाला के खुलासे ने जिले के संबंधित विभागों में हलचल मचा दी है। इस घोटाले में अब ईओडब्ल्यू कानपुर ने जिले के दो कॉलेजों के प्राचार्य सहित चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। यहां आश्चर्य की बात यह है कि एक ही संस्था को तीन-तीन बार छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि जारी कर दी गई। जिले के कई और शिक्षा माफिया छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के नाम पर हुए घोटाले की जद में आ सकते हैं।