जीत के बाद विनोद उपाध्याय को कंधे पर उठाकर खुशी मनाते समर्थक।
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विनोद उपाध्याय के फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद अब जिले की सियासत करवट लेगी। विनोद उपाध्याय खुद को भाजपाई घोषित कर चुके हैं। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपाई का काबिज होना पार्टी के लिए भी फायदे की बात होगी। इधर भाजपा आलाकमान के भी इस चुनाव को लेकर स्थानीय नेताओं से फीडबैक लेने की चर्चा है। यह भी माना जा रहा है कि अब जल्द ही विनोद उपाध्याय विधिवत भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर लंबे समय तक रामवीर उपाध्याय के परिवार अथवा उनके समर्थकों का ही कब्जा रहा है। ऐसे में एक तरह से इस कुर्सी पर बसपा समर्थक ही काबिज रहे हैं। दो साल पहले ओमवती यादव ने जब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुईं तो यह कुर्सी सपा के खाते में चली गई। अब विनोद उपाध्याय ने फिर जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर ली है। इस बार फर्क इतना है कि विनोद उपाध्याय खुद को भाजपाई घोषित कर चुके हैं, जबकि पिछले कार्यकाल में वह बसपाई थे। इससे स्पष्ट है कि जिले में सियासी समीकरण अब फिर बदलेंगे। हालांकि विनोद उपाध्याय अभी विधिवत भाजपा के सदस्य नहीं हैं, लेकिन माना जा रहा है कि वह जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि भाजपा के स्थानीय नेता इसे लेकर कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं।
मैं भाजपा में हूं। सदस्यता कब मिलेगी, इस पर पार्टी को निर्णय लेना है। अब जिले में रुके हुए विकास कार्य होंगे। यह जनता की जीत है।
विनोद उपाध्याय, जिला पंचायत अध्यक्ष