टप्पल स्थित विकास खंड कार्यालय के सभागार परिसर में 5 दिसंबर को उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा सीमा विवाद के संबंध में बैठक हुई। दोनों प्रदेशों के प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के किसानों को बैठक में बुलाया तथा सभी बिन्दुओं पर विस्तारपूर्वक वार्ता की।
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अलीगढ़ ने बताया कि भारत सरकार द्वारा दोनों प्रांतों के सीमा विवाद के निस्तारण के लिए पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। समिति द्वारा एक दीक्षित एक्ट बनाया गया था, जिसमें यह तय था कि जो भूमि उत्तर प्रदेश की हरियाणा प्रांत में चली गई वो उत्तर प्रदेश के काश्तकारों की रहेगी और जो भू-कानून लागू होगा वो हरियाणा प्रांत का होगा। इसी प्रकार जो भूमि हरियाणा के किसानों की उत्तर प्रदेश में आ गई हैं वो भूमि हरियाणा के काश्तकारों की रहेगी व भू-कानून उत्तर प्रदेश के राजस्व विभाग के लागू होंगे।
इसलिए दीक्षित अवार्ड के तहत 1943 के नक्शे के अनुसार पैमाइश कराकर वर्षों से चले आ रहे सीमा विवाद का निस्तारण किया जाएगा, इसलिए लिए दोनों प्रांतों के राजस्व विभाग की टीमें का गठन करके शीघ्र निस्तारण कराया जाएगा। इस अवसर पर दोनों प्रांतों के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया व निर्णय पर अपनी सहमति जताई।
सीमा विवाद वार्ता बैठक में प्रमुख रूप से कार्यवाहक उपजिलाधिकारी खैर अनिल काटियार, पुलिस क्षेत्राधिकारी वरुण कुमार सिंह, नायब तहसीलदार टप्पल अजेन्द्र कुमार, तहसीलदार गोपाल कृष्ण मिश्रा, टप्पल थाना प्रभारी विजयकान्त शर्मा, राजस्व निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार सहित हरियाणा प्रदेश के उपजिलाधिकारी होडल रनवीर सिंह, तहसीलदार होडल अनिल कुमार, नायब तहसीलदार हसनपुर मोहम्मद खान आदि अन्य आलाधिकारी मौजूद रहे।