ग्रामीण क्षेत्रों में खेती को लंबे समय तक पुरुषों का कार्य माना जाता रहा है। हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव खेरिया की हरीश देवी इस सोच को बदलने का काम कर रही हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना रही हैं।
हरीश देवी ने गांव की करीब 10 महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है। उन्होंने लगभग 50 बीघा भूमि बटाई पर ली है। इस जमीन पर महिलाएं मिलकर विभिन्न फसलों का उत्पादन कर रही हैं। खेतों में बुवाई से लेकर कटाई तक का अधिकांश कार्य महिलाएं स्वयं करती हैं। स्वयं सहायता समूह से मिली आर्थिक और सामाजिक मजबूती ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। पहले महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित थीं। अब वे खेती के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। गांव की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेतों में काम कर रही हैं।
महिला सशक्तिकरण का उदाहरण
ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण की दिशा में हरीश देवी का यह प्रयास एक मिसाल है। उन्होंने साबित किया है कि अवसर और आत्मविश्वास मिलने पर महिलाएं सफल हो सकती हैं। हरीश देवी कहती हैं कि एकजुट होकर महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।