हाथरस को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल किए जाने के प्रस्ताव से जिले के विकास की उम्मीदों को एक बार फिर पंख लग गए हैं। उद्यमियों को उम्मीद है कि अगर ऐसा हो गया तो इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास की संभावना काफी बढ़ जाएगी, जिसका सीधा फायदा उद्यमियों के साथ मध्यम वर्ग और बेरोजगार युवाओं को भी मिलेगा। उनके लिए अपने ही क्षेत्र में काम-धंधे की संभावना काफी बढ़ जाएंगी।
सबसे बड़ा फायदा तो यह होगा कि हाथरस के उद्योग-धंधों की बदहाली दूर हो जाएगी और यहां के उद्यमियों को उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल मिल सकेगा। स्तरीय आवासीय सुविधाओं का दायरा बढ़ सकेगा और लोगों की बेहतर रिहायश की ख्वाहिश भी पूरी हो सकेगी। जिन सुख-सुविधाओं की खातिर लोग दिल्ली-एनसीआर के शहरों का रुख करते हैं, वह सुविधाएं भविष्य में यहीं मिल सकेंगी।
दिल्ली-एनसीआर की तरफ स्थानीय उद्यमियों और बेरोजगारों का पलायन भी थम सकेगा। वैसे भी यमुना एक्सप्रेस बनने के बाद हाथरस से दिल्ली-एनसीआर की दूरी महज दो घंटे की रह गई है। ऐसे में जानकार मानते हैं कि यदि हाथरस एनसीआर में शामिल हो जाता है तो यहां औद्योगिक विकास की संभावना सबसे ज्यादा होगी। प्रदेश सरकार की तरफ से इस आशय का प्रस्ताव केंद्र सरकार को जाने के बाद यहां के उद्यमियों की खुशी का ठिकाना नहीं है। जिले में हाथरस के एनसीआर से जुड़ने के नफा-नुकसान पर चर्चा शुरू हो गई है। सभी अपने नजरिए से भविष्य की इस संभावित उपलब्धि के फायदे तलाशने में जुटे हैं और एक-दूसरे को भी यह फायदे दिखाकर सुनहरे भविष्य का सपना दिखा रहे हैं।