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बिटिया की मौत पर हर तरफ गम और गुस्सा

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हाथरस: चंदपा क्षेत्र की बिटिया की मौत के बाद तालाब चौराहे पर जाम लगाते आक्रोशित लोग व मौके पर मौजू? - फोटो : HATHRAS
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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सामूहिक दुष्कर्म की शिकार अनुसूचित जाति की बिटिया की मौत की जानकारी मिलते ही शहर से लेकर देहात में तनाव व्याप्त हो गया और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। दिन में लोगों ने जुलूस निकालकर जाम लगाया तो शाम को कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। देर शाम तक बिटिया का शव गांव नहीं आया था और सैकड़ों लोग गांव के जाने वाले रास्ते पर मौजूद थे।
सपा, कांग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी तादाद में लोग बिटिया के गांव जाने वाले रास्ते पर एकत्रित हो गए। वहां इन लोगों की पुलिस से तीखी नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने इन लोगों को बिटिया के गांव नहीं जाने दिया। चंदपा से लेकर बिटिया के गांव तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात रहा। खुद आईजी ने अलीगढ़ से आकर यहां कानून व्यवस्था की कमान संभाली। जिले के अलावा पूरे अलीगढ़ रेंज का पुलिस फोर्स हाथरस में मौजूद रहा।
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गांव की नाकाबंदी कर दी गई। बिटिया के गांव जा रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्यौराज जीवन व उनके बेटे राजेश राज जीवन को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया और सादाबाद थाने ले गई। वहीं प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। वहीं इस घटना के चारों आरोपितों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
बिटिया की मौत की जानकारी मिलने पर पूरे शहर और देहात में लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन, पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल की अगुवाई में सपाई चंदपा थाने से आगे बिटिया के गांव जाने वाले रोड पर पहुंच गए। इन लोगों की मांग थी कि वह बिटिया के गांव जाना चाहते हैं, लेकिन पुलिस ने इन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। इस दौरान तीखी नोकझोंक हुई। बाल्मीकि समाज के काफी लोग भी वहां पहुंच गए।
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कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य की अगुवाई में कांग्रेसियों ने वहीं सड़क पर खड़े होकर प्रदर्शन किया। पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय, जिला पंचायत सदस्य रामेश्वर उपाध्याय को भी पुलिस ने गांव नहीं जाने दिया। देर शाम तक मृतका का शव दिल्ली से यहां नहीं आया था और काफी तादात में लोग गांव जाने वाले रास्ते के बाहर शव के आने का इंतजार कर रहे थे।
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