सरकारी क्रय केंद्र बंद होने के बाद अब किसानोें को अपना बाजरा नुकसान पर बेचना पड़ रहा है। सरकार की ओर से निर्धारित समर्थन मूल्य 2775 रुपये है, लेकिन वर्तमान में मंडी की आढ़तों पर उनका बाजरा इससे एक हजार रुपये तक कम दाम में खरीदा जा रहा है।
गौरतलब है कि शासन ने जिले में बाजरा की खरीद के लिए सात क्रय केंद्रों का संचालन 31 दिसंबर तक किया था, लेकिन इन क्रय केंद्रों पर भीड़ बढ़ने और बिचौलियों का वर्चस्व होने के कारण किसानों को अपना बाजरा बेचने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ा। इस कारण बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य पर अपना बाजरा बेचने से वंचित रह गए थे।
अब चूंकि क्रय केंद्र पूरी तरह बंद हो चुके हैं, इसलिए किसानों के पास आढ़तियों को बाजरा बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। किसानों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मंडी में वर्तमान में बाजरा का बाजार भाव 1,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है, जोकि समर्थन मूल्य से 1077 रुपये कम है। प्रभारी खाद्य विपणन अधिकारी राजीव वर्मा का कहना है कि समर्थन मूल्य पर खरीद की अवधि 31 दिसंबर थी। लक्ष्य पूरा होने के बाद फिर से लक्ष्य बढ़ाया गया था।
बाजरा बेचने के लिए क्रय केंद्र पर चक्कर लगाते रहे। हमें जो नंबर दिया गया था, उस तारीख पर पहुंचे तो क्रय केंद्र पर बाजरा की खरीद पूरी हो चुकी थी। अब आढ़ती भी मजबूरी देखते हुए 2,300 से 1,700 रुपये में खरीद कर रहे हैं। -प्रवीन कुमार निवासी गांव सीकुर
जब क्रय केेंद्र पर बाजरा नहीं बिक सका तो मजबूरी में मंडी में जाकर बेचना पड़ रहा है। अब मंडी में भी इसके रेट 500 से एक हजार रुपये क्विंटल तक कम कर दिए गए हैं। मजबूरी में सस्ता बेचना पड़ रहा है।
-सुशील कुमार निवासी गांव सीकुर
सादाबाद के सरकारी क्रय केंद्र पर मारामारी के चलते बाजरा नहीं बिक सका। मजबूरी में अब हाथरस मंडी समिति में बाजरा बेचने आया हूं। यहां आढ़त पर बाजरा 1725 में बिका है। मजबूरी में कम दाम पर बेचना पड़ा है। -राकेश जुरैल निवासी गोविंदपुर