सरकारी खरीद केंद्र को मंडी की दुकान बी-70 पर ले जाया गया, लेकिन वहां पर भी आढ़तियों अपना बाजरा डंप कर रखा है। मजबूरी में सरकारी खरीद केंद्र सब्जी मंडी के पीछे गोदाम में खोलना पड़ा है। नतीजा किसानों को क्रय केंद्र नजर नहीं आ रहा।
हाथरस मंडी समिति में सरकारी मक्का खरीद केंद्र खुलते ही लापता हो गया है। 2410 रुपये प्रति क्विंटल की सरकारी दर का असली मुनाफा आढ़तियों के हाथ जा रहा है। मजबूरी में किसान 1200-1900 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अपनी उपज आढ़तियों के हाथ बेचने पर मजबूर हैं।
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15 जून से मक्का की खरीद शुरू हुई है। 31 जुलाई तक 8500 क्विंटल मक्का की सरकारी खरीद की जानी है। हाथरस मंडी समिति की दुकान ए-6 पर मक्का की सरकारी खरीद का केंद्र खोला गया था। डिप्टी आरएमओ कमला प्रसाद यादव कहते हैं कि वहां पर आढ़तियों ने अपनी खरीद के मक्का के ढेर लगा रखे हैं।
इस पर सरकारी खरीद केंद्र को मंडी की दुकान बी-70 पर ले जाया गया, लेकिन वहां पर भी आढ़तियों अपना बाजरा डंप कर रखा है। मजबूरी में सरकारी खरीद केंद्र सब्जी मंडी के पीछे गोदाम में खोलना पड़ा है। नतीजा किसानों को क्रय केंद्र नजर नहीं आ रहा। आठ दिन से मक्का के एक दाने की सरकारी खरीद नहीं हो सकी। उधर आढ़तियों की बल्ले-बल्ले हो गई है। वह अपनी मर्जी के भाव पर किसानों से मक्का खरीद रहे हैं।
मंडी में मक्का लेकर आया था, लेकिन सरकारी खरीद केंद्र खोजने नहीं मिला। मजबूरी में एक आढ़ती के हाथ 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर अपना मक्का बेचना पड़ा। -रामहरी शर्मा, किसान, गांव धौरपुर।
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मंडी में सरकारी क्रय केंद्र नहीं दिखा। आढ़ती 1410 रुपये प्रति क्विंटल में मक्का खरीद रहे हैं, जबकि सरकारी भाव 2410 रुपये है। मजबूरी में सस्ते में उपज बेचने पर मजबूर हैं। -रमेश चंद्र, किसान, पहाड़पुर।
मजबूरी में सब्जी मंडी के पीछे गोदाम में खरीद केंद्र ले जाने के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया था। मिले निर्देश के अनुसार बृहस्पतिवार को गोदाम से हटाकर पुन: मंडी समिति की दुकान बी-70 पर मक्का खरीद केंद्र स्थापित करा दिया जाएगा, ताकि किसान आसानी से क्रय केंद्र पर पहुंचकर सरकारी दर पर अपनी उपज बेच सकें। -कमला प्रसाद यादव, डिप्टी आरएमओ।