विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी ने सत्ताधारी गठबंधन के गढ़ में बड़ी सेंधमारी की है। मुरसान के पूर्व चेयरमैन और क्षेत्र के कद्दावर नेता रजनेश कुशवाहा ने भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर फिर से समाजवादी पार्टी में लौट आए हैं।
सादाबाद के पूर्व सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल ने यह जानकारी दी। कहा कि रजनेश कुशवाहा के सपा में लौटने से क्षेत्र के पिछड़े वर्ग में पार्टी को बढ़त मिलेगी। सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में मुरसान क्षेत्र अहम भूमिका निभाता है।
इसे पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल का दांव माना जा रहा है। उन्होंने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सादाबाद सीट से सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। अब देवेंद्र अग्रवाल सादाबाद और आसपास के क्षेत्रों में फिर से सपा का परचम फहराना चाहते हैं।
भाजपा-रालोद के गढ़ को चुनौती
सादाबाद और मुरसान क्षेत्र को पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय लोकदल का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा और रालोद का गठबंधन इस क्षेत्र में बेहद मजबूत स्थिति में है। जाट और किसान बाहुल्य इस क्षेत्र में भाजपा-रालोद की जुगलबंदी को सीधी चुनौती देना किसी भी दल के लिए आसान नहीं है। सपा इस अभेद्य किले में सुराख करने की कोशिश कर रही है।
सपा की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार समाजवादी पार्टी अब गैर जाट ओबीसी और अन्य जनाधार वाले स्थानीय नेताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। रजनेश कुशवाहा को अपने पाले में लाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे सपा को क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी। पार्टी 2027 के चुनावों के लिए अभी से जमीन तैयार कर रही है। यह कदम जिले की तीनों विधानसभा सीटों के समीकरण साधने का प्रयास है।