जिले में स्वास्थ्य सेवाएं खुद बीमार पड़ी हैं। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद भी कैसे की जा सकती है। बागला जिला अस्पताल से लेकर सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। यहां मरीजों का उपचार जुगाड़ से किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि बागला जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 25 पदों के सापेक्ष महज 13 की ही तैनाती है। इस कारण यहां आने वाले मरीजों के लिए उपचार और परामर्श ले पाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण अक्सर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है। जिला अस्पताल में सर्जन, बेहोशी के चिकित्सक, त्वचा रोग स्पेशलिस्ट, चेस्ट फिजिशियन और पैथोलॉजिस्ट न होने से मरीजों को निजी अस्पताल में इन बीमारियों का इलाज कराना पड़ता है।
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर 89 में से 43 ही चिकित्सक तैनात
ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो यहां मरीज इलाज के लिए पूरी तरह निजी चिकित्सकों पर ही निर्भर हैं। सरकारी अस्पतालों के भरोसे रहेंगे तो इनकी बीमारी और बिगड़ जाएगी। देहात क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों पर 89 पदों के सापेक्ष 43 चिकित्सकों ही तैनाती है। यही हाल पैरामेडिकल स्टाफ का भी है। इनके सहारे जिले के आठ सीएचसी और 27 पीएचसी का संचालन हो रहा है, जबकि जिले के प्रत्येक सीएचसी पर प्रतिदिन औसतन 500 से 600 मरीज आते हैं।
जिले के सभी सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। इस कारण यहां महिला मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को या तो निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है या फिर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। सीएचसी पर थायराइड और हार्माेंस सहित कई अन्य जांचों की भी सुविधा नहीं है। इन जांचों के लिए मरीजों को निजी लैब पर जाना पड़ता है और जांच के लिए मोटा खर्चा करना पड़ता है।
कुरसंडा के स्वास्थ्य केंद्र को सीएचसी का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन महज एक चिकित्सक के सहारे ही इस सीएचसी का संचालन किया जा रहा है। जब चिकित्सक छुट्टी पर होते हैं तो फाॅर्मासिस्ट व अन्य स्टाफ ही दवा दे पाता है।
-बनी सिंह निवासी नगला ध्यान, कुरसंडा।
सीएचसी सहपऊ पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। इस कारण सादाबाद या हाथरस में अल्ट्रासाउंड कराने जाना पड़ता है। चिकित्सकों की भी कमी है।
-विनीत पुंढीर निवासी कुंकरगवां, सहपऊ।
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इस कारण अच्छे इलाज के लिए निजी अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है। अस्प्ताल की इमरजेंसी रेफर सेंटर बनी हुई है।
-रिंकू निवासी झींगुरा।
जिला अस्पताल महज रेफर सेंटर का काम कर रहा है। यहां गंभीर मरीजों को भर्ती करने की सुविधा तक नहीं है। चिकित्सकों की कमी के कारण यहां सुविधाएं नदारद हैं।
-विवेक निवासी नया नगला।
जिले में चिकित्सकों और पैरोमेडिकल स्टाफ की कमी चल रही है। इस संबंध में शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। शासन से ही इनकी तैनाती संभव है।
-डॉ. राजीव राय, प्रभारी सीएमओ