सर्दी की बारिश ने सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में चलने वाली ठंडी और नमीयुक्त हवाओं में हानिकारक रोगाणुओं की सक्रियता बढ़ गई है, जिससे वायुजनित बीमारियां तेजी बढ़ रही हैं। बुधवार को बागला जिला अस्पताल की ओपीडी में 284 ऐसे मरीज पहुंचे, जिन्हें कफ और जुकाम की शिकायत थी। इसके अलावा 352 मरीज सांस और 2़13 लोग त्वचा रोगों की शिकायत के साथ पहुंचे। कुल 1464 मरीजों ने परामर्श लिया।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डाॅ.वरुण चौधरी ने बताया कि इस मौसम की बारिश में वायुजनित रोगों के फैलने का जोखिम बढ़ गया है। वायु प्रदूषण और नमी में मौजूद बेहद सूक्ष्म रोगाणुओं के लिए यह अनुकूल स्थिति है। ये सूक्ष्म रोगाणु सांस के जरिये शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। इससे न केवल फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि मुंह, आंत और त्वचा से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। हवा में मौजूद फंगल स्पोर्स और बैक्टीरिया खुजली का कारण बन रहे हैं। दूषित कणों के संपर्क में आने से पाचन तंत्र (आंत) पर भी बुरा असर पड़ रहा है। हवा में मौजूद फंगल स्पोर्स से श्वसन संबंधी परेशानी होती है।
एक हफ्ते में ऐसे बढ़े संक्रमण के मरीज
बागला जिला अस्पताल की ओपीडी में बीते एक हफ्ते में मरीजों की संख्या में 30-40 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। एक सप्ताह में आठ हजार मरीज यहां परामर्श और उपचार के लिए पहुंचे। इनमें 30 फीसदी मरीज गले व सांस की नली के संक्रमण के रहे। बयान
नमी वाले इस वातावरण में वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। इस समय कफ और खांसी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यदि लक्षण तीन दिन से ज्यादा रहें, तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें।
डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस बागला जिला अस्पताल।
बचाव के उपाय
-ठंडी हवा और धूल-कणों से बचने के लिए मास्क जरूर पहनें।
-गले के संक्रमण और कफ से बचने के लिए गुनगुना पानी पीएं।
-बारिश में भीगने से बचें और घर लौटकर हाथ-पैर साफ करें।
-बाहर के खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि बैक्टीरिया इसको दूषित कर देते हैं।
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