शहर की एक दुकान पर नवरात्र के लिए चुनरी की खरीदारी करतीं महिलाएं। संवाद
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त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही शहर के कपड़ा बाजार में पारंपरिक हस्तशिल्प और हेरिटेज परिधानों की बहार आ गई है। इस साल गुजरात और राजस्थान के समृद्ध सांस्कृतिक क्राफ्ट्स जैसे गज्जी सिल्क बांधनी और अहीर कढ़ाई के साथ-साथ पारंपरिक मिरर वर्क वाली चुनरी की खासी मांग है।
शहर के मुख्य कपड़ा बाजार जैसे नयागंज, सराफा, कमला बाजार, सासनी गेट और सादाबाद गेट स्थित प्रमुख वस्त्र प्रतिष्ठानों में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। दुकानदारों ने त्योहारों के इस खास मौके को देखते हुए पहले से ही राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और गुजरात के कच्छ व भुज से सीधे कारीगरों द्वारा तैयार किया गया विशेष स्टॉक मंगा रखा है।
गज्जी सिल्क पर प्राकृतिक रंगों से तैयार पारंपरिक बांधनी और उस पर महीन राबरी व अहीर कढ़ाई का काम महिलाओं को बेहद आकर्षित कर रहा है। इसके साथ ही शीशों के बारीक काम से सजी रंग-बिरंगी चुनरी और दुपट्टे युवतियों की पहली पसंद बने हुए हैं। बाजार में हो रही इस खरीदारी का दायरा केवल नवरात्र तक ही सीमित नहीं है।
महिलाएं जहां एक ओर नवरात्र में माता रानी के पूजन, घट स्थापना और गरबा-डांडिया उत्सव में पहनने के लिए इन चुनरियों और पोशाकों को खरीद रही हैं, वहीं दूसरी ओर दिवाली के तुरंत बाद शुरू होने वाले सहालग के सीजन को देखते हुए भी एडवांस खरीदारी की जा रही है। महिलाओं का मानना है कि हेरिटेज और हैंडक्राफ्टेड परिधान कभी आउट ऑफ फैशन नहीं होते। शादी-विवाह के पारंपरिक आयोजनों जैसे हल्दी, मेहंदी और संगीत समारोह में गज्जी सिल्क बांधनी और भारी कढ़ाई वाले दुपट्टे राजसी और अलग लुक देते हैं।