तिल किलो 90 से 98 रुपये तक थे, लेकिन अब यह बढ़ कर 120 से 130 तक पहुंच गए हैं। तिल के दाम बढ़ने के बाद स्पेशल गजक, रेबड़ी के दाम भी 220 से 250 रुपये प्रति किलो और साधारण गजक, रेबड़ी 80 से बढ़कर 100 रुपये प्रति किलो तक हो गई है।
अचानक एक साथ इतनी भारी मूल्य वृद्धि होने का कारण कानपुर और आगरा की तिल मंडी में माल की आपूर्ति रुकना बताया जा रहा है। माल की आवक न होने के कारण तिल के दाम रातों रात आसमान पर पहुंच गए हैं।
तिल के थोक विक्रेता महेश चंद्र ने कहा कि तिल के दाम अचानक ही बढे़ हैं। अचानक महंगाई का कोई अनुमान नहीं था। बिना धुले हुए तिलों की आवक भी कम हो गई, जिसके कारण तिल के दाम बढ़े हैं। आगरा और कानपुर की मंडियों से तिल हाथरस आता है।