इंडियन बैंक की मुख्य शाखा, हाथरस में एक बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। बैंक के अंचल कार्यालय के अंचल प्रबंधक, डॉ. दिब्येंदु दे ने कोतवाली सदर में 4.38 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। एफआईआर में 171 ऋणधारकों, 4 मध्यस्थों और 14 वेंडर्स को आरोपी बनाया गया है।
डॉ. दिब्येंदु की शिकायत के अनुसार इस घोटाले को 16 अक्तूबर 2017 से 27 जून 2022 के बीच अंजाम दिया गया। बैंक द्वारा कराई गई आंतरिक जांच में खुलासा हुआ कि इस अवधि के दौरान विभिन्न एमएसएमई ऋण खातों के माध्यम से बैंक को कुल 4,38,36,857.13 रुपये की भारी वित्तीय क्षति पहुंचाई गई है।
इस तरह हुई धोखाधड़ी
बैंक की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ऋणधारकों द्वारा ऋण आवेदन में दिखाई गई परियोजनाओं के आधार पर जमीन पर कोई भी औद्योगिक या विनिर्माण इकाई स्थापित नहीं पाई गई। ऋण स्वीकृत कराने के लिए बैंक में प्रस्तुत किए गए कर इनवॉइस, बिल, कोटेशन, वाउचर और अन्य कागजात प्रथम दृष्टया कूटरचित और मिथ्या पाए गए। वेंडर्स द्वारा ऋण प्रकरणों में दर्शाई गई मशीनरी या उपकरणों की कोई वास्तविक भौतिक आपूर्ति नहीं की गई। इस तरह जिस उद्देश्य के लिए बैंक ने ऋण दिया था, उस उद्देश्य में धनराशि उपयोग ही नहीं हुआ।
पुलिस ने शुरू की छानबीन
क्षेत्राधिकारी सिटी हिमांशु माथुर ने बताया कि प्रकरण गंभीर है। इस संबंध में धोखाधड़ी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। अब एक-एक खाता धारक व मध्यस्थता करने वालों की छानबीन की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस षड्यंत्र में किसी तत्कालीन बैंक अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता थी या नहीं।