हाथरस। जिले में शौचालयों के निर्माण में अनियमितताओं की बू आ रही है। शौचालय निर्माण से पूर्व कराए गए बेसलाइन सर्वे में पंचायतराज विभाग ने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा पकड़ा है। ग्राम पंचायत स्तर से शौचालय निर्माण की सूचियां प्राप्त किए बिना और बिना एडीओ पंचायत के सत्यापन के ही जिले में शौचालयों की डिमांड के लिए ऑनलाइन फीडिंग करा दी गई। इतना ही नहीं फोटो भी अपलोड करा दिए गए।
जिला पंचायतराज अधिकारी दिनेश सिंह ने जांच के दौरान इन गड़बड़ियाें के चलते फीडिंग और अपलोडिंग की कार्यवाही पर रोक लगा दी। ग्राम पंचायतों को मिशन के तहत दी गई धनराशि निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराते हुए कार्यपूर्ति एवं उपभोग प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन बार-बार निर्देशित किए जाने के बावजूद आज तक जिले की किसी भी ग्राम पंचायत ने यह सूची, उपभोग और कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र ही उपलब्ध नहीं कराए हैं।
कहीं मानक के अनुरूप नहीं मिले शौचालय
डीपीआरओ आला अधिकारियों को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि किसी भी निरीक्षण में उन्हें शौचालय मानक के अनुरूप नहीं मिले, जबकि समग्र ग्रामों में जिले के विभिन्न अधिकारी नोडल अधिकारी बनाए गए थे। डीएम, सीडीओ, एसडीएम और अन्य अधिकारियों द्वारा भी इन ग्रामों से संबंधित ग्राम पंचायत का निरीक्षण सत्यापन भी किया जाता रहा है। उसके बावजूद शौचालय न तो पूरे बनाए गए हैं और न हीं मानक के अनुरूप बने हैं। शौचालय का मुख्य भाग सेक्शन चेंबर और सोख्ता गड्ढों को तो मनमाने ढंग से छोटा और अनुपयुक्त बनाकर केवल खानापूरी की गई है।
एडीओ पंचायत को सत्यापन का जिम्मा
डीपीआरओ ने अब सभी एडीओ पंचायत को निर्देश दिए हैं कि वह शासनादेश के अनुसार सभी ग्राम पंचायत सचिवों और सफाई कर्मियों का सहयोग लेकर शौचालयों का सत्यापन करते रिपोर्ट सौंपें। यह भी सुनिश्चित करें कि दोनों सोख्ता गड्ढों का ऊपर से नीचे तक आंतरिक व्यास एक मीट और गहराई 1.10 मीटर रहे। चिनाई गोला और जालीदार हो। जाली दो इंच से ज्यादा की नहीं काटी जाए। जंक्शन चैंबर में अनिवार्य रूप से पीबीसी की वाई प्रयोग कर मल सीधे पैन से गडढ्े में जाए। कम से कम ढाई इंच को आरसीसी पिटकवर से गड्ढे ढके जाएं। रूरल पैन का प्रयोग हो। कोठरी की ऊंचाई एक तरफ से 6.50 फीट और दूसरी तरफ से 6.75 फीट होनी चाहिए। लाभार्थी पात्र श्रेणी का हो और उसके घर में पूर्व किसी योजना से निर्मित शौचालय नहीं हो। उन्होंने चेतावनी दी है कि सूचियां और सत्यापन रिपोर्ट नहीं मिलने पर किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कार्यवाही के लिए मामला शासन को संदर्भित किया जाएगा।