हसायन में ईशन नदी पर बनी बिना रेलिंग की सपाट पुलिया पर कार गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। रेलिंग लगाने का सवाल उठा तो हाथरस और अलीगढ़ के अफसरों ने पुलिया के अपने क्षेत्र में होने से ही इन्कार कर दिया। यानी अभी यहां रेलिंग या सुरक्षा के लिए कोई दीवार नहीं लगने वाली है। शायद अभी किसी और हादसे का इंतजार सिंचाई विभाग के अफसरों को है।
हसायन के गांव बरसामई के निकट बृहस्पतिवार की रात हुए हादसे के बाद सामने आया कि अगर नदी की पुलिया के दोनों ओर सुरक्षा दीवार या रेलिंग होती तो हादसा न होता। पुलिया से पहले संकेतक लगे होते, प्रकाश व्यवस्ता की जाती तो भी हादसे को टाला जा सकता था। सिंचाई विभाग के अफसरो से शनिवार को पूछा गया कि क्या वह इस स्थान पर रेलिंग या सुरक्षा दीवार बनवाएंगे, तो उनका चौकाने वाला जवाब आया।
हाथरस के अधिकारियों ने कहा कि यह पुलिया उनके क्षेत्र में नहीं आती, अलीगढ़ सिंचाई खंड यहां काम करता है। अलीगढ़ सिंचाई खंड के अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र उनका नहीं है। पुलिया से एक-दो किलोमीटर पहले उनका क्षेत्र खत्म हो जाता है। हालांकि भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र हाथरस की सीमा में आता है। लेकिन सिंचाई विभाग का अपना अलग पैमाना है।
-हसायन क्षेत्र में हमारे यहां से संबंधित कोई इलाका नहीं है। वह नदी व उसकी पुलिया हमारे खंड के अंतरगत नहीं आती हैं। अलीगढ़ ड्रेनेज खंड ही इसके बारे में जानकारी दे सकता है।,,,,,,,,बलजीत सिंह, एक्सईएन, सिंचाई खंड, हाथरस।
-जिस जगह पर हादसा हुआ है वह जगह हमारे सीमा में नहीं आती। उससे करीब एक-दो किलोमीटर पहले तक की सीमा हमारी है। इसके बारे में हमें जानकारी नहीं है कि वह स्थल किसके अंतरगात आता है।,,,,,,,,,सागर सिंह, एई, सिंचाई खंड, अलीगढ़।
तड़के छह बजे शवों को लेकर गांव सराय राजनगर रवाना हुए परिजन
ईशन नदी में स्विफ्ट डिजायर कार के पलटने से हुई चिकित्सक, उनके परिवार की महिला व दो बेटियों की मौत के बाद उनके शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए। शनिवार की सुबह छह बजे लेकर जलेसर के गांव सराय राज नगर (पत्थर की सराय) लेकर रवाना हुए। शवों के गांव में पहुंचते ही कोहराम मच गया।
मृतक नगेंद्र पाल सिंह के बेटा आकाश रूस में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा था। बेटे के आने के इंतजार के चलते परिजनों ने शव को देरी से गांव में ले जाने का निर्णय किया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शव ले जाने की स्थिति में पूरी रात शवों को रखने पर परिजनों की हालत भी शवों को देखकर बिगड़ सकती है। इस वजह से शवों को शनिवार की सुबह लेकर निकले हैं।
डॉक्टर नगेंद्र पाल सिंह कार से अलीगढ़ के सारसौल में अपनी बहन दुर्गेश के देवर की शादी समारोह के दौरान होने वाले मंडप कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गए थे। हादसे के वक्त अलीगढ़ से सिकंदराराऊ होते हुए पुरदिलनगर जलेसर मार्ग से अपने गांव सराय राजनगर (पत्थर की सराय) को लौट रहे थे। पुरदिलनगर मार्ग पर गांव बरसामई के निकट नील गाय को बचाने की कोशिश में कार नदी में गिर गई थी। हादसे में नगेंद्र पाल सिंह, पूनम पत्नी मानवेंद्र, बेटी काव्या (3), एक वर्षीय भूमि की मौत हो गई थी। छह लोग घायल हो गए थे।