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Hathras News: एसी मैकेनिक संजय की हत्या में पांच दोषियों को उम्रकैद

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न्यायालय में पेश होने के बाद जाते संजय हत्याकांड के आरोपी। संवाद - फोटो : Samvad
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जमीन विवाद में एसी मैकेनिक संजय कुमार की हत्या में एडीजे, कोर्ट-6 शैलेंद्र सिंह ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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मामला कोतवाली सदर के लाला का नगला गांधी नगर का है। पांच जुलाई 2023 को करीब ढाई बजे संजय कुमार अपनी दुकान पर बैठे थे। इसी दौरान बाइक सवार दो युवक वहां पहुंचे और संजय पर गोली चला दी। गोली उनके बाएं पैर में लगी। जिला अस्पताल से अलीगढ़ ले जाते समय रास्ते में संजय की मौत हो गई थी।

पुलिस ने आठ जुलाई 2023 को मोनिशकांत शर्मा निवासी चित्रकूट बगीची व देवेंद्र ठाकुर उर्फ देवू निवासी रहना कला को गिरफ्तार लिया था। इनसे तमंचे भी बरामद किए गए थे। पुलिस जांच में सामने आया था कि संजय और आरोपियों के बीच नहरोई बंबा के पास जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर विवाद चल रहा था। घटना से करीब एक सप्ताह पहले भी आरोपियों ने संजय को जमीन न खरीदने की धमकी दी थी।
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इसी विवाद में घटना को अंजाम दिया था, जिसमें हरदुआगंज अलीगढ़ का गौरव चौधरी, महामौनी, मुरसान का संतोष जाट व नगला पदू का रामू भी शामिल था। मोनिशकांत व गौरव ने संजय पर फायर किया था, बाकी तीनों कार में घटना स्थल के पास मौजूद थे। पुलिस ने पांचों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

पांचों को समान रूप से दोषी माना, आर्म्स एक्ट में भी सजा
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर पांचों को हत्या के लिए समान रूप से दोषी पाया। अर्थदंड जमा न करने पर एक-एक साल का अतिरिक्त कारावास होगा। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 27 में मोनिशकांत व गौरव को पांच-पांच साल की कैद व तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। धारा 25 में रामू को छोड़कर बाकी चारों को दो-दो साल की कैद व तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। इसके अलावा 147 व 148 में भी पांचों को दो-दो साल की कैद व तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

तीन साल चली सुनवाई में 11 गवाह हुए पेश
मामले में अभियोजन ने कुल 11 गवाहों को पेश किया। इनमें वादी मुकदमा मनोज कुमार समेत प्रत्यक्षदर्शी और अन्य गवाह, चिकित्सकीय तथा पुलिस अधिकारी शामिल थे। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार बचाव पक्ष की ओर से कोई मौखिक अथवा दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया गया।

सीसीटीवी फुटेज ने जोड़ी अहम कड़ी
घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज में दो आरोपी भागते नजर आए थे। वादी के अधिवक्ता ने बताया कि अभियोजन पक्ष से इन्हीं सीसीटीवी फुटेज की पेनड्राइव भी अदालत में पेश की, जो कि अहम सबूत साबित हुई। अदालत में फुटेज चलाई गई, जिससे आरोपियों की पहचान की गई।
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