आग की लपटों में फैक्टरी घिरी थी, अंदर बड़े भाई धर्मेंद्र सिंह फंसे थे, छोटा भाई बिंटू कंबल ओढ़कर फैक्टरी में घुस गया और उनकी तलाश करने लगा। आधा घंटा तक उन्होंने कोशिश की, पैर भी झुलस गए, इसी बीच दमकल भी पहुंच गई, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी वह अपने भाई को नहीं बचा पाए। बाद में प्लांट की मशीन के नीचे उनका शव मिला।
हाथरस में सादाबाद के आगरा रोड पर स्थित बायोपैक्स पॉलिथीन फैक्टरी में 6 मार्च रात जोरदार धमाके के साथ भीषण आग लग गई। आग की लपटों में घिरकर फैक्टरी संचालक की पति के दोस्त और हॉस्पिटल संचालक धर्मेंद्र (38) जिंदा जल गए। उनके साथ गए दो अन्य लोग भी झुलस गए।
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बाद में पहुंचे मृतक के भाई ने आग की लपटों से धर्मेंद्र सिंह का शव को निकालने की कोशिश की, जिसके चलते वह भी झुलस गए। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद दमकल ने आग पर काबू पाया। बताया जा रहा है कि फैक्टरी में कुछ दिन पहले कोई केमिकल आया था। फैक्टरी में कोई खराबी आ गई थी, जिसे ठीक करते समय केमिकल ने आग पकड़ ली और विस्फोट हो गया। अग्निशमन विभाग ने शार्ट सर्किट से आग लगने का अंदेशा जताया है। पुलिस ने षडयंत्र रचकर केमिकल एकत्र करने और गैर इरादतन हत्या में मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
धर्मेंद्र जमुना विहार कॉलोनी राया रोड सादाबाद निवासी निरंजन सिंह के पुत्र थे। उनका आगरा रोड पर चौधरी चरण सिंह तिराहे के पास हॉस्पिटल है। उसके सामने ही गांव नगला कली, सहपऊ निवासी कांता प्रसाद की पत्नी गुंजन गौतम की एसबी बायोपैक्स के नाम से पॉलिथीन फैक्टरी है। कांताप्रसाद और धर्मेंद्र दोस्त हैं। कांता प्रसाद सेना की मेडिकल कोर में है और इस समय यूनएन मिशन पर लेबनान में तैनात है।
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निरंजन सिंह ने बताया कि मध्य रात्रि करीब साढ़े 12 बजे धर्मेंद्र के फोन पर कांता प्रसाद की कॉल आई और कहा कि तुम फैक्टरी चले जाओ, सिस्टम में कुछ गड़बड़ी है। कॉल लगातार चलती रही, धर्मेंद्र अपने चचेरे भाई प्रदीप और हॉस्पिटल कर्मी भूपेंद्र को साथ लेकर फैक्टरी पहुंचे तो कांता प्रसाद ने उन्हें कुछ काम करने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि अचानक एक स्विच को ऑन करते ही फैक्टरी में विस्फोट हो गया और केमिकल ने आग पकड़ ली। धर्मेंद्र आग की लपटों में घिर गए। प्रदीप और भूपेंद्र कुछ पीछे थे, वह भी झुलस गए। उन्होंने भागकर फैक्टरी से बाहर आकर खुद को बचाया। कुछ देर बाद धर्मेंद्र के भाई बिंटू को कांता प्रसाद ने कॉल किया और बताया कि फैक्टरी में आग लग गई है, धर्मेंद्र का फोन नहीं लग रहा। बिंटू मौके पहुंचे और धर्मेंद्र का शव निकालने की कोशिश की, इसमें वह भी झुलस गए। निरंजन सिंह ने इस मामले में मालिक कांता प्रसाद, उनकी पत्नी गुंजन गौतम और प्रबंधक मिथुन यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
हम जब मौके पर पहुंचे तो फैक्टरी में धमाका होने की जानकारी दी गई। शव जला हुआ मिला है। केमिकल कौन सा है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। शार्ट सर्किट से आग लगने की संभावना जताई गई है। मौके पर जले हुए तार मिले हैं।-दीपक कुमार, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी
कंबल ओढ़कर आग की लपटों में बड़े भाई को खोजते रहे बिंटू
आग की लपटों में फैक्टरी घिरी थी, अंदर बड़े भाई धर्मेंद्र सिंह फंसे थे, छोटा भाई बिंटू कंबल ओढ़कर फैक्टरी में घुस गया और उनकी तलाश करने लगा। आधा घंटा तक उन्होंने कोशिश की, पैर भी झुलस गए, इसी बीच दमकल भी पहुंच गई, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी वह अपने भाई को नहीं बचा पाए। बाद में प्लांट की मशीन के नीचे उनका शव मिला।
आगरा रोड पर एसबी बायोपैक्स नाम की जिस फैक्टरी हादसा हुआ, वह एक साल पहले शुरू हुई थी और उसमें पॉली बैग बनाए जाते हैं। बिंटू ने बताया कि फैक्टरी मालिक गुंजन गौतम के पति का फोन आने के बाद उनके भाई धर्मेंद्र चले गए थे। बाद में उनके पास भी फोन आया कि फैक्टरी में आग लग गई है और तुम्हारे भाई का नंबर नहीं लग रहा है। इसके बाद वह स्वयं फैक्टरी पर पहुंचे। वहां मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि अंदर तीन लोग गए थे, दो बाहर आए गए। आपके भाई अंदर हैं। वह भागकर सामने स्थित अपने हॉस्पिटल से कंबल लाए और उसे ओढ़कर फैक्टरी में अंदर घुस गए।
मुख्य द्वार से एक अंडरग्रांउड का रास्ता है, आग की लपटे काफी तेज थीं, बार-बार विस्फोट हो रहे थे। प्लाईबोर्ड जल कर गिर रहे थे। उन्होंने मिट्टी के गमलों को आग के ऊपर फोड़ा और अंदर जाने का रास्ता बनाया। बिंटू ने बताया कि अंदर सांस लेना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने अंदर पहुंचकर दो गेट तोड़े। एक केबिन में चारपाई थी। नीचे से ऊपर आकर प्रथम तल पर पहुंचे, जहां तक संभव हो सका, फैक्टरी में देखा लेकिन भाई नहीं मिले। इसी दौरान मौके पर पुलिस व दमकल आ गई। पाइप लाइन बिछाकर राहत कार्य शुरू किया। तीन दमकल की गाडी और आई। बिंटू ने बताया कि बायोपैक्स प्लांट की मुख्य मशीन के नीचे भाई का शव मिला। जला हुआ फोन गेट के पास मिल गया। बिंटू ने बताया कि केमिकल इतना खतरनाक था कि आरडीएक्स से भी दस गुना तेज धमाके हो रहे थे। बाद में बिंटू, चचेरे भाई प्रदीप और हॉस्पिटल कर्मी भूपेंद्र को सीएचसी से प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
पिता निरंजन सिंह ने आरोप लगाया है कि कांता प्रसाद, उनकी पत्नी गुंजन गौतम से धर्मेंद्र का रुपयों का बड़ा लेनदेन चलता रहा है। उन्होंने इसी वजह से धर्मेंद्र की हत्या करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि फैक्टरी प्रबंधक मिथुन यादव बुढ़ाइच के रहने वाला है और वह जाते समय धर्मेंद्र को चाबी दे गया था। घटना के तुंरत बाद मिथुन यादव पर फोन किया तो उसका फोन स्विच ऑफ था। मृतक के भाई बिंटू ने बताया कि उनके भाई की फैक्टरी में साझेदारी नहीं थी, लेकिन लेनदेन होता रहता था। कांता प्रसाद ने उसके भाई धर्मेंद्र से साठ-आठ माह में करीब 60-65 लाख रुपये लिए थे।
धर्मेंद्र सिंह का तीन दिन पहले था जन्मदिन
धर्मेंद्र सिंह और उनका परिवार मूल रूप से गांव मीरा के रहने वाले थे और उनका शादाबाद में भी मकान है। तीन दिन पहले उनका जन्मदिन था। पूरे परिवार ने उसे मनाया था। किसी को नहीं पता था कि चार दिन बाद ही उनका निधन हो जाएगा। धर्मेंद्र ही पूरे की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।