हाथरस। वित्त मंत्री अरुण जेटली सोमवार की सुबह जब आम बजट पेश करेंगे तो हाथरस वाले भी उनकी तरफ उम्मीद भरी निगाह से देख रहे होंगे। शहर के व्यापारी और उद्यमियों को जेटली के बजट से काफी उम्मीदें हैं। उन्हें लगता है कि वित्त मंत्री इस बार आयकर रियायतों का पिटारा खोलेंगे। उद्योग-व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बड़ी घोषणाएं होंगी। कर्ज पर ब्याज दर घटेगी तो जमा योजनाओं पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी होगी। लेकिन वित्त मंत्री का बजट उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरेगा, ये तो सोमवार को ही पता लगेगा। उद्योग-व्यापार जगत की ख्वाहिश है कि वित्त मंत्री के बजट से ऐसी घोषणाएं निकलें, जिससे देश में सुस्त पड़ती जा रही कारोबारी गतिविधियों में फिर से तेजी आ जाए और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुलभ हो सकें।
इन उद्योगों को रियायतों की दरकार हाथरस में मुख्यत: हींग, रंग-रसायन, अचार-मुरब्बा, कालीन, मेटल, रेडीमेट गारमेंट्स, दाल-दलहन, देसी घी, मसाले का बड़ा कारोबार है, जबकि बिसावर का चांदी उद्योग, पुरदिलनगर का मूंगा-मोती, सासनी का कांच और फाउंड्री उद्योग, हसायन का इत्र और चूड़ी उद्योग भी अपनी पहचान बचाने के लिए जूझ रहा है। इनसे जुड़े उद्यमियों और कारोबारियों को भी इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। वह चाहते हैं कि इन लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को कुछ बड़े ऐलान करने होंगे, वरना वक्त के साथ हाथरस के यह उद्योग इतिहास बन जाएंगे।
इतिहास बन गए हाथरस के उद्योग-धंधेएक वक्त था जब हाथरस कानपुर के बाद सूबे में दूसरे नंबर की मंडी का दर्जा रखता था। लेकिन करों की मार और सरकारी प्रोत्साहन की कमी ने इसकी यह पहचान करीब दो दशक पहले ही छीन ली। जिन जगहों पर कभी कॉटन, टैक्सटाइल, तेल मिल और दाल मिल होते थे, वहां अब या तो कॉलोनियां बन चुकी हैं या फिर शॉपिंग कांपलेक्स। अगर केंद्र सरकार ने अब भी ध्यान नहीं दिया तो रहे-सहे उद्योगों का भी यही हाल होने वाला है।
बोले उद्यमीउद्योगों की हालत इस वक्त बेहद खराब है। केंद्र सरकार को उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए कदम उठाने चाहिए। उद्योगोें के लिए सब्सिडी के साथ ट्रेंड लेबर की उपलब्धता के लिए कार्यक्रम चलाने चाहिए। आयकर और सेवा कर की दरों को तर्कसंगत बनाना चाहिए। तभी उद्योगों का भला हो सकेगा।-राधेश्याम अग्रवाल, दाल उद्यमी----रेडीमेड गारमेंट्स का कारोबार बेहद संकट के दौर से गुजर रहा है। हर साल बढ़ते करों के बोझ और प्रोत्साहन की कमी से यह कारोबार भी सिमटता जा रहा है। अब इसमें पहले जैसी बात नहीं रही। चूंकि इससे हजारों लोगों का भविष्य जुड़ा हुआ है, इसलिए बजट में इसे बचाने के लिए भी घोषणा होनी चाहिए।-सुनीत जैन, गारमेंट्स कारोबारी
आयकर छूट सीमा तीन लाख रुपये तक बढ़े। गैर खाताधारक करदाताओं के अलावा 80 सी में छूट की सीमा भी 1.50 लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपये होनी चाहिए। ट्रांजेक्शन पर हो रही नोटिसबाजी पर लगाम लगनी चाहिए। छूट सीमाएं बढ़ेंगी तो निश्चित रूप से निवेश बढ़ेगा और सरकारी राजस्व भी।-पीयूष गुप्ता, कर अधिवक्ता