जिला उद्योग केंद्र की टूटी पड़ी इमारत।
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सहपऊ। कस्बा सहपऊ स्वतंत्रता के सात दशक बाद भी उद्योग धंधे, शिक्षा एवं आवागमन की सुविधा में अन्य कस्बों की अपेक्षा पिछड़ा हुआ है। कस्बे में उद्योग नाम की कोई चीज नहीं है।
लगभग 25 वर्ष पूर्व जब कस्बा जिला मथुरा का भाग था उस समय 33 लघु उद्योगों की इकाइयों के लिए जिला उद्योग केंद्र ने एक स्थान आवंटित किया था। उसमें चाहरदीवारी, विद्युतीकरण, रोड आदि का निर्माण कराया गया एवं उसके लिए इमारतें भी बनाई गई जो इस समय अपनी दुर्दशा के आंसू बहा रही है। आवागमन के लिए कस्बे से 800 मीटर दूर प्राइवेट बस अड्डा है। पहले इसके लिए लोगों को पैदल ही जाना पड़ता था अब ई रिक्शा की सुविधा हो गई है।
जलेसर रेलवे स्टेशन कस्बे से पांच किमी दूर है। रात में न तो बसें चलती हैं न ही रेलवे स्टेशन जाने के लिए कोई सुविधा है। स्टेशन पर एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए भी रास्ता नहीं है। दो एक्सप्रेस और तीन सवारी गाड़ी को छोड़कर कोई भी ट्रेन समय से नहीं चलती।