नगर पालिका परिषद में फर्जी एफडीआर के जरिये दो करोड़ रुपये के बिजली के कार्याें के टेंडर लिए जाने के खुलासे ने खलबली मचा दी है। पिछले दो साल में जलकल, निर्माण व प्रकाश विभाग के माध्यम से हुए कार्याें में लगाई गईं 135 फिक्स डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) जांच के घेरे में आ गई हैं। जल्द ही इन सभी का सत्यापन कराया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि नगर पालिका में टेंडर लेने के लिए फर्जी एफडीआर लगाने की शिकायत डीएम से की गई थी। आरोप है कि जलकल विभाग के अवर अभियंता द्वारा फर्जी एफडीआर तैयार कर टेंडरों की फाइलों में लगाई जा रही हैं और खुद ही इनका सत्यापन कराया जा रहा है। डीएम के निर्देश पर मंगलवार को अपर जिलाधिकारी न्यायिक ने कलक्ट्रेट पहुंचकर टेंडर से संबंधित पत्रावलियों को कब्जे में ले लिया था।
सूत्र बताते हैं कि फिलहाल पिछले दो साल में पालिका परिषद में विभिन्न विभागों के माध्यम से हुए कार्याें का ब्योरा तैयार कर लिया गया है। जलकल विभाग की 60, निर्माण विभाग की 60 और प्रकाश विभाग की 15 टेंडर पत्रावलियों में लगी एफडीआर को सूचीबद्ध कर लिया गया है। इन सभी का उन बैंकों को पत्र भेजकर सत्यापन कराया जाएगा, जहां से यह बनवाई गई हैं। सत्यापन में कुछ और एफडीआर फर्जी निकलने की संभावना जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि जिन फर्माें के नाम से बनीं एफडीआर फर्जी निकली हैं, उन फर्माें ने नगर पालिका हाथरस के अलावा नगर पंचायत सासनी, पुरदिलनगर और सिकंदराराऊ में भी कार्य कराए हैं। एडीएम न्यायिक शिवनारायण शर्मा ने बताया कि एफडीआर के सत्यापन के बाद ही जांच पूरी हो सकेगी। फिलहाल हाथरस नगर पालिका परिषद के कार्याें की जांच कराई जा रही है।