नगर पालिका परिसर में बुधवार की दोपहर को सरकारी अभिलेखों में लगे होने वाले दस्तावेज कूड़े के ढेर में मिले। छानबीन में पता चला कि यह एफडीआर हैं, जो ठेकेदारी में बोंड के रूप में काम आती हैं। आशंका है कि जानबूझ कर कार्यालय दस्तावेजों को ठिकाने लगाने का प्रयास किया गया है। मामले में छानबीन की जा रही है।
फिक्सड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) बैंक या वित्तीय संस्थान में सावधि जमा करने की रसीद है। इसे ठेकेदार बैंक में राशि जमा करने के बाद बंधक के रूप में संबंधित विभाग में जमा कराते हैं, जो कि फाइलों में लगा दी जाती हैं। बांके बिहारी कॉलोनी, कोटा रोड के रहने वाले राजू कौशिक शनिवार को जन्म प्रमाणपत्र के काम से नगर पालिका परिसर में आए थे।
यहां उन्हें कूड़े के ढेर पर कुछ कागज पड़े मिले, जो कि एफडीआर लग रहे थे। उन्होंने उठाकर देखा तो वास्तव में यह एफडीआर ही निकलीं। इसके बाद वह नगर पालिका कार्यालय पहुंचे और कर्मचारियों को कागज दिखाए। सभी एफडीआर पर ईओ, नगर पालिका को बंधक लिखा हुआ था। अलग-अलग फर्म की पांच एफडीआर बताई जा रही हैं, जिनकी कीमत लगभग 4.35 लाख रुपये बताई जा रही है। राजू कौशिक ने इन्हें कार्यालय अधीक्षक के सुपुर्द किया है।
सामने आ चुका है फर्जी एफडीआर प्रकरण
नगर पालिका में मई 2025 में फर्जी एफडीआर प्रकरण सामने आया था। इनके जरिये करोड़ों रुपये के ठेके लिए गए थे। इस प्रकरण में नगर पालिका के जेई के खिलाफ कोतवाली हाथरस गेट में एफआईआर भी दर्ज हुई थी, जिसमें बाद में भ्रष्टाचार की धाराएं भी बढ़ाई गई थीं। अब एफडीआर मिलने से पालिका में खलबली मची हुई है।
एफडीआर 2023 की हैं। तब की सभी फाइल पूरी हैं। इस बात की जांच कराई जा रही है कि ये परिसर में कैसे पहुंचीं। -रोहित सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद, हाथरस