प्रकरण में विवेचना करते हुए पुलिस ने जितेंद्र, बहादुर, प्रभुदयाल व रामश्री के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। प्रकरण विचारण के लिए एडीजी एफटीसी कोर्ट द्वितीय में पहुंचा। विचारण के दौरान ही रामश्री की मौत हो गई थी। पति जितेंद्र की भी मृत्यु की जानकारी न्यायालय को दी गई थी। अभियुक्त बहादुर सिंह ने मृत्यु प्रमाण पत्र की छाया प्रति भी लगाई थी, लेकिन उससे यह साबित नहीं हो सका कि जितेंद्र की मृत्यु हो चुकी है। इसलिए न्यायालय ने उसकी फाइल पृथक कर दी।
शनिवार को एडीजे माधवी सिंह ने बहादुर व प्रभुदयाल की फाइल पर सुनवाई करते हुए अंतिम निर्णय दिया। गवाह व सबूतों के आधार पर दोनों पर आरोप सिद्ध पाए गए। न्यायालय ने मृतका के जेठ बहादुर व ससुर प्रभुदयाल को दहेज हत्या में सात-सात साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। दहेज उत्पीड़न में दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माना तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।