केस 2 : बड़े खेतों के लिए पर्याप्त नहीं सोलर पंप
अर्जुनपुर के किसान राजवीर शर्मा का अनुभव थोड़ा अलग रहा है। उन्होंने करीब चार साल पहले पीएम कुसुम योजना के तहत 1.60 लाख रुपये (सब्सिडी के बाद) खर्च करके सोलर सिस्टम लगवाया था। राजवीर का कहना है कि पूरे दिन में यह सोलर पंप मुश्किल से दो से ढाई बीघा खेत की ही सिंचाई कर पाता है, जो बड़े खेतों के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि बारिश, कोहरा या बादल होने पर यह सिस्टम लगभग बंद हो जाता है। ऐसे में सिंचाई के लिए उन्हें अभी भी ट्यूबवेल और बिजली पर निर्भर रहना पड़ता है। उनके अनुसार यह सोलर पंप छोटी फसलों, जैसे बरसीम या सब्जियों की सिंचाई के लिए तो ठीक है, लेकिन बड़े खेतों के लिए पूरी तरह कारगर नहीं है।
तकनीक अच्छी, लेकिन क्षमता बढ़ाने की जरूरत
हाथरस निवासी मनोहर शर्मा कहते हैं कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई तकनीक पर्यावरण के लिहाज से बेहतर है और इससे बिजली व डीजल पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है। हालांकि, कुछ का मानना यह भी है कि बड़े खेतों और ज्यादा पानी की जरूरत वाली फसलों के लिए इसकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है ताकि योजना का पूरा लाभ किसानों तक पहुंच सके।