फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

PM Kusum Yojana: सोलर पंप से उम्मीदें बड़ी, खेतों तक पहुंच रही राहत कम, किसानों की यह है मिली-जुली राय

Sat, 07 Mar 2026 12:24 PM IST
Chaman Kumar Sharma प्रशांत भारती, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हाथरस  के किसानों का कहना है कि सोलर पंप छोटे खेतों के लिए तो ठीक है लेकिन बड़ी जोत की सिंचाई के लिए इसकी क्षमता सीमित है। करीब पांच से 10 बीघा तक की जमीन पर तो किसी तरह काम चल जाता है लेकिन इससे अधिक क्षेत्र की सिंचाई करना मुश्किल हो जाता है।
विज्ञापन
गांव चाचपुर व अर्जुनपुर में सोलर प्लांट दिखाते किसान - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

किसानों को हरित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएम कुसुम योजना के जरिए सब्सिडी देकर सोलर पंप लगाए जा रहे हैं। साल 2019 से अब तक जिले में 158 खेतों पर सोलर पंप लगे हैं जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में एक भी नया किसान योजना से नहीं जुड़ा है। इसे लेकर जमीनी स्तर पर किसानों के अनुभव अलग-अलग सामने आ रहे हैं। कुछ के लिए यह तकनीक खेती में राहत देने वाली साबित हुई है तो कुछ किसानों का कहना है कि बड़े खेतों में यह सिस्टम अभी भी पूरी तरह कारगर नहीं हो पा रहा है।

विज्ञापन


हाथरस  के किसानों का कहना है कि सोलर पंप छोटे खेतों के लिए तो ठीक है लेकिन बड़ी जोत की सिंचाई के लिए इसकी क्षमता सीमित है। करीब पांच से 10 बीघा तक की जमीन पर तो किसी तरह काम चल जाता है लेकिन इससे अधिक क्षेत्र की सिंचाई करना मुश्किल हो जाता है। सोलर पंप में पानी का प्रेशर भी काफी कम आता है। इसमें आमतौर पर 2.5 इंच का पाइप लगा होता है जबकि पारंपरिक डीजल या बिजली के पंपों में चार इंच या उससे अधिक क्षमता के पाइप इस्तेमाल किए जाते हैं जिससे पानी का दबाव और बहाव दोनों ज्यादा रहता है। 

केस 1 : अब नहीं आता बिजली का बिल
चांचपुर के रहने वाले किसान रामदत्त पाठक सोलर पंप को खेती के लिए काफी लाभदायक मानते हैं। उनका कहना है कि इस तकनीक ने उनकी सिंचाई की समस्या काफी हद तक हल कर दी है। उन्होंने बताया कि सोलर पंप लगने के बाद वह बिना अतिरिक्त खर्च अपने खेतों में सिंचाई आसानी से कर लेते हैं। पहले जहां बिजली के बिल और डीजल के खर्च की चिंता रहती थी, अब उससे काफी राहत मिल गई है। रामदत्त के मुताबिक, धूप तेज होने पर यह सिस्टम बहुत प्रभावी ढंग से काम करता है। इसके साथ ही करीब 20 साल की वारंटी भी किसानों के लिए भरोसा बढ़ाती है। उनके अनुसार यह एक तरह का वन-टाइम निवेश है, जिसने उनकी खेती की राह आसान कर दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

केस 2 : बड़े खेतों के लिए पर्याप्त नहीं सोलर पंप
अर्जुनपुर के किसान राजवीर शर्मा का अनुभव थोड़ा अलग रहा है। उन्होंने करीब चार साल पहले पीएम कुसुम योजना के तहत 1.60 लाख रुपये (सब्सिडी के बाद) खर्च करके सोलर सिस्टम लगवाया था। राजवीर का कहना है कि पूरे दिन में यह सोलर पंप मुश्किल से दो से ढाई बीघा खेत की ही सिंचाई कर पाता है, जो बड़े खेतों के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि बारिश, कोहरा या बादल होने पर यह सिस्टम लगभग बंद हो जाता है। ऐसे में सिंचाई के लिए उन्हें अभी भी ट्यूबवेल और बिजली पर निर्भर रहना पड़ता है। उनके अनुसार यह सोलर पंप छोटी फसलों, जैसे बरसीम या सब्जियों की सिंचाई के लिए तो ठीक है, लेकिन बड़े खेतों के लिए पूरी तरह कारगर नहीं है।
तकनीक अच्छी, लेकिन क्षमता बढ़ाने की जरूरत
हाथरस निवासी मनोहर शर्मा कहते हैं कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई तकनीक पर्यावरण के लिहाज से बेहतर है और इससे बिजली व डीजल पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है। हालांकि, कुछ का मानना यह भी है कि बड़े खेतों और ज्यादा पानी की जरूरत वाली फसलों के लिए इसकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है ताकि योजना का पूरा लाभ किसानों तक पहुंच सके।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें